इटारसी। सडक़ सुरक्षा और जनहित को प्राथमिकता देते हुए नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आज सफेद हेडलाइट के उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एसडीओपी को एक ज्ञापन सौंपा। यह पहल सामाजिक कार्यकर्ता अर्चना मालवीय के नेतृत्व में की गई। संगठनों ने प्रदेश सरकार से यह अपील की है कि वाहनों में सफेद हेडलाइट के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाई जाए और पीली हेडलाइट को सभी वाहनों में अनिवार्य किया जाए।
दुर्घटनाओं को रोकने प्रतिबंध आवश्यक
ज्ञापन में कहा गया है कि वाहनों से निकलने वाली अत्यधिक तेज और सफेद रोशनी सडक़ पर सामने से आ रहे राहगीरों एवं वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। संगठनों ने दावा किया कि यह तेज रोशनी चालकों की आंखों में चकाचौंध पैदा कर देती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। संगठनों का मत है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो हजारों निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती है और सडक़ों पर सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
सख्ती से नियम पालन और जागरूकता की मांग
संगठनों ने एसडीओपी से यह भी आग्रह किया कि परिवहन विभाग एवं पुलिस प्रशासन को इस नियम का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही, आम जनता में यातायात के प्रति अनुशासन और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए सडक़ सुरक्षा जनजागरूकता अभियान चलाने की भी मांग की गई।
इस जनहितकारी मुहिम में श्री गौड़ मालवीय ब्राह्मण समाज महिला मंडल संगठन, मातृशक्ति एवं वरिष्ठ मंडल, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी, राष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी, और मुस्कान संस्था परिवार सहित अनेक सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढक़र भाग लिया और प्रशासन से इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
भारत में वाहनों की हेडलाइट्स के रंग और तीव्रता (चमक) को लेकर स्पष्ट नियम हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य रात में या खराब मौसम में सडक़ सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
भारत में वाहनों की हेडलाइट्स से संबंधित प्रमुख नियम
भारत में हेडलाइट्स का विनियमन मुख्य रूप से केंद्रीय मोटर वाहन नियम और मोटर वाहन अधिनियम के तहत किया जाता है। नियम रंग, चमक और स्थापित करने के तरीके से संबंधित हैं।
हेडलाइट का रंग
भारत में वाहनों में केवल सफेद या पीली रोशनी वाली हेडलाइट्स ही कानूनी रूप से मान्य हैं। किसी भी अन्य रंग की हेडलाइट्स (जैसे नीली, लाल, बैंगनी आदि) का उपयोग अवैध है, क्योंकि वे भ्रम पैदा कर सकती हैं या आपातकालीन वाहनों की रोशनी से मेल खा सकती हैं।
चमक और रंग तापमान : यही वह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है जिस पर सामाजिक संगठन आपत्ति जता रहे हैं। नियमों के अनुसार, हेडलाइट की चमक (तीव्रता) और कलर टेम्परेचर (रंग का तापमान) के लिए मानक तय किए गए हैं। यदि आपकी हेडलाइट इन मानकों से अधिक तेज है, तो यह अवैध मानी जाती है और इसके लिए चालान हो सकता है।
वर्तमान में, कई वाहन मालिक बाजार से अनाधिकृत लाइट लगवा लेते हैं। ये लाइटें अत्यधिक तेज होती हैं और सामने से आने वाले ड्राइवर की आँखों को चौंधिया देती हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ता है। यदि वाहन निर्माता कंपनी ने ही वाहन में सफेद हेडलाइट्स लगाई हैं, तो वे सरकारी मानकों के भीतर होती हैं और आमतौर पर कानूनी होती हैं। समस्या तब आती है जब लोग मार्केट से खरीदकर अत्यधिक चमकदार लाइटें लगवाते हैं।
फॉग लाइट
फॉग लाइट्स के लिए पीले या हल्के पीले-सफेद रंग को प्राथमिकता दी जाती है। इसका कारण यह है कि पीली रोशनी का प्रकीर्णन कम होता है, जिससे यह कोहरे, बारिश और धुंध जैसी खराब मौसम की स्थिति में सडक़ को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाती है। फॉग लाइट्स को मुख्य हेडलाइट्स से नीचे स्थापित किया जाना चाहिए।
हाई बीम का उपयोग
यह नियम रंग से नहीं, बल्कि उपयोग से संबंधित है। हाई बीम का उपयोग केवल अंधेरी और सुनसान सडक़ों पर ही किया जाना चाहिए। जब आप किसी दूसरे वाहन के करीब पहुंच रहे हों, या शहर के भीतर चला रहे हों, तो हाई बीम का उपयोग करना अवैध है और चालान का कारण बन सकता है, क्योंकि यह सामने वाले ड्राइवर को भ्रमित करता है। सफेद हेडलाइट पूरी तरह से अवैध नहीं है, लेकिन अत्यधिक तेज और गैर-मानक सफेद या लाइटें जो सामने वाले ड्राइवर को चकाचौंध करती हैं, वे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 1778 के तहत जुर्माने के अधीन हैं।








