इटारसी। साल के पहले चंद्र ग्रहण का साया समाप्त होते ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में ‘शुद्धिकरण’ और ‘आस्था’ का महापर्व शुरू हो गया है। जैसे ही ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण का मोक्ष काल (समाप्ति) हुआ, पूरे शहर के मंदिरों में शंखध्वनि और घंटों के नाद के साथ सन्नाटा टूट गया और भक्ति का संचार हुआ।
गंगाजल से धुले देवालय, भगवान ने धारण किए नवीन वस्त्र
ग्रहण काल समाप्त होते ही शहर के श्री द्वारिकाधीश मंदिर, बूढ़ी माता मंदिर और हनुमानधाम सहित सभी प्रमुख मंदिरों के पट खोल दिए गए। इसके तुरंत बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। पुजारियों द्वारा गर्भगृह की साफ-सफाई के बाद भगवान की प्रतिमाओं का पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक किया। ग्रहण के सूतक काल के पुराने वस्त्रों को त्यागकर भगवान को अत्यंत सुंदर नवीन वस्त्र और आभूषण धारण कराए गए। पूरे मंदिर परिसर को धोकर पवित्र जल का छिड़काव किया गया, जिससे वातावरण पुन: सात्विक हो गया। मान्यता अनुसार ग्रहण के बाद पवित्र नदी में स्नान करने से दोषों का निवारण होता है।
स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर बैठे जरूरतमंदों को अनाज, तिल, गुड़ और वस्त्रों का दान कर पुण्य लाभ कमाया।
घरों में भी हुआ शुद्धिकरण
केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों ने भी अपने घरों में शुद्धिकरण किया। ग्रहण के दौरान रखे गए भोजन को विसर्जित कर ताज़ा भोजन बनाया गया। तुलसी के पौधों और पूजा घरों में विशेष दीप प्रज्वलित किए गए।








