इटारसी। होली के उल्लास के बीच मंगलवार की शाम इटारसी सहित पूरे क्षेत्र के आकाश में प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार देखने को मिला। नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू की विशेष पहल पर क्षेत्र के लोगों ने इस साल के पहले चंद्रग्रहण का न केवल दीदार किया, बल्कि टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा की सतह पर पड़ती पृथ्वी की छाया को भी करीब से देखा।
टेलिस्कोप से दिखा ‘ग्रस्तोदय’ नजारा
सारिका घारू ने बताया कि यह ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण था, जिसमें चंद्रमा ग्रहण लगी हुई स्थिति में ही उदित हुआ। टेलिस्कोपिक नजारे में चंद्रमा अपनी सामान्य चमक के बजाय ताम्र वर्ण यानी तामिया लाल रंग में दिखाई दे रहा था। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3 लाख 80 हजार किलोमीटर की दूरी पर था।
समय और वैज्ञानिक बारीकियां
- आंशिक ग्रहण : शाम 6:47 बजे तक रहा, जिसमें चंद्रमा का एक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में था।
- उपछाया ग्रहण : इसके बाद रात 7:53 बजे तक उपछाया ग्रहण चला।
सारिका घारू ने बताया कि वैज्ञानिक रूप से जब चंद्रमा उपछाया में होता है, तो उसे सूर्य का पूरा प्रकाश नहीं मिल पाता, जिससे वह हल्का पीला और मद्धम दिखाई देता है। हालांकि इसकी धार्मिक मान्यता नहीं होती, लेकिन खगोलीय रूप से यह एक महत्वपूर्ण घटना है।
भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश
सारिका ने लोगों को बताया कि सौर ग्रहण के विपरीत, चंद्रग्रहण को बिना किसी विशेष चश्मे के सीधे आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी के आ जाने से होने वाली यह खगोलीय घटना महज एक छाया का खेल है।








