मानव वध के आरोपी को सश्रम कारावास

मानव वध के आरोपी को सश्रम कारावास

इटारसी। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती प्रीति सिंह की अदालत ने आरोपी नानकराम पिता मोकल सिंह उम्र 35 वर्ष, निवासी बोरखेड़ा, तहसील इटारसी जिला होशंगाबाद को उसके ही गांव के युवक संतोष की आपराधिक मानव वध के रूप में बिजली के करंट से मृत्यु कारित करने का दोषी पाते हुए भारतीय दंड विधान की धारा 304 भाग 2 के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं 1000 रुपए अर्थदंड से दंडित करने का आदेश सुनाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास और भुगतना होगा।
इस प्रकरण में आरोपी 2 माह 15 दिन तक जेल में रहा है और उसके बाद वह जमानत पर था, इसलिए सजा सुनाए जाने के पश्चात सजा वारंट से उसे सजा भोगने हेतु केंद्रीय जेल होशंगाबाद भेज दिया गया है। इस प्रकरण में शासन की ओर से संपूर्ण पैरवी वरिष्ठ अपर लोक अभियोजक राजीव शुक्ला ने की थी। उन्होंने 14 साक्षियों का परीक्षण न्यायालय में कराया था, जिनमें से छह साक्षियों ने उक्त घटना का संपूर्ण समर्थन किया है।
अभियोजन कहानी के अनुसार घटना इस प्रकार है कि 23.2.2018 को शाम को बादल छाने से फरियादी मुकेश एवं उसका भाई संतोष बालकुमार तथा उसकी मां अतरिया बाई चने की फसल को इकट्ठा करने रात करीब 8:09 बजे अपने खेत पर गए थे। चने की फसल इकट्ठा करके घर वापस आ रहे थे, तब रास्ते में सबसे आगे संतोष उसके पीछे मां एवं उसके पीछे छोटा भाई बालकुमार चल रहा था। मुकेश बीच में चल रहा था। रात के लगभग 10:30 पर जब सभी नानकराम की खेत की मेढ़ पर आए तो एकदम से उसका बड़ा भाई संतोष गिर गया जिसे मुकेश ने उठाया तो संतोष बेहोश हो गया था। कुछ बोल नहीं रहा था। तब उसने अपने भाई संतोष को उठाकर अन्य परिजनों के साथ घर लेकर गया। जहां उसका भाई गिरा पड़ा था वहां उसने टॉर्च जलाकर जाकर देखा कि एक लोहे का पतला तार खींचा हुआ है जब बिजली की रोशनी में देखा तो संतोष के दोनों पैरों में बिजली का करंट लगने के निशान थे। घर लाने के पश्चात संतोष की मृत्यु हो गई थी, जिसकी रिपोर्ट थाना केसला में फरियादी मुकेश ने की थी। शिकायत के आधार पर गांव के राधेश्याम, बुधराम, नानकराम एवं अंकित के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया था। चारों आरोपी के विरुद्ध न्यायालय इटारसी में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जिसका विचारण द्वितीय अपर सत्र न्यायालय इटारसी में किया।
घटना से संबंधित खेत पर उपस्थित तीन आरोपी राधेश्याम, बुधराम एवं अंकित के विरुद्ध साक्ष्य नहीं आने से उन्हें उक्त धारा से दोषमुक्त किया है। लेकिन आरोपी नानकराम के पिता मोकल सिंह का खेत मौके पर होने और उसी खेत की बागुड़ में तार फेंसिंग में बिजली के तार की सप्लाई से करंट फैलाने का पंचनामा मौके पर तैयार हुआ था और इसी तार के संपर्क में आने से संतोष की मृत्यु वहां हुई थी। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट लिखा है कि आरोपी नानकराम द्वारा किया अपराध गंभीर प्रकृति का प्रकट होता है, इसलिए उसे परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है और उसके द्वारा करंट फैलाकर आपराधिक मानव वध प्रकृति का अपराध घटित किए जाने के साथ मौके पर पाए जाने से उसे धारा 304 भाग 2 भारतीय दंड विधान के तहत दोषी पाया जाकर सजा से दंडित किया है।

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