महोदय,
विगत् दिनों नर्मदापुरम् संभाग के प्रभारी कमिश्नर डॉ पवन शर्मा ने संभाग के सभी कलेक्टर्स को सप्ताह में एक दिन एस डी एम एवं तहसीलदार कार्यालय का निरीक्षण करने के निर्देश दिये हैं। बेहतर होता यदि भोपाल में बैठकर कमिश्नरी चला रहे संभागायुक्त पहले अपने कार्यालय की व्यवस्थाओं को दुरूस्त करते। वरना क्या कारण था कि करीबी जिले बैतूल के आदिवासी विकास खंड शाहपुर के निलंबित बी आर सी राधेश्याम भास्कर को गंभीर आरोपों के बावजूद उनके कार्यालय ने आसानी से बहाल कर आरोपी बी आर सी को ग्राम पाढर के स्कूल में ससम्मान व्याख्याता के पद पर पदस्थ कर दिया। हास्यास्पद तो यह है कि सी एम हेल्प लाइन में निलंबित बी आर सी राधेश्याम भास्कर की शिकायत होने के बाद भी जनजातीय कार्य विभाग उसको बचाने में लगा हुआ है। खैर। इधर नर्मदापुरम् जिले की कलेक्टर सोनिया मीणा जेल का निरीक्षण कर रही हैं। जबकि उनकी नाक के नीचे भ्रष्टाचार पनप रहा है। फल फूल रहा है। वे प्राथमिकता के आधार पर पहले इसकी सुध लें। यथा नर्मदापुरम् का कार्यालय सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, जिला शिक्षा केन्द्र और आगे बढ़ें तो जिले के आदिवासी विकास खंड केसला की बाल विकास परियोजना इत्यादि। साथ ही कलेक्टर यह भी देखें कि जिले में कितने अधिकारी ऐसे हैं जो तीन साल से भी अधिक समय से अपने पदों पर जमे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछले दिनों ही इस सम्बंध में सख्त निर्देश जारी किये हैं। देखना ये है कि कलेक्टर इन आदेशों का गम्भीरता से पालन करती हैं या इस आदेश को भी हवा में उड़ा देती हैं क्योंकि संभवतः मार्च के प्रथम सप्ताह में लोकसभा चुनावों के मद्देनजर आचार संहिता लागू हो सकती है। उसका फायदा उठाते हुये उपरोक्त अधिकारी-कर्मचारी हमारे ऊपर लदे रहेंगे। आशा है नर्मदापुरम् के विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा इस पत्र का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर को जिले की व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित करेंगे।
विनोद कुशवाहा
एल आई जी / 85
न्यास कॉलोनी, इटारसी




