जबलपुर/इटारसी/गुना। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के खिलाफ दायर एक याचिका को स्वीकार करते हुए न केवल विश्वविद्यालय पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया है, बल्कि यह भी आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को ड्राइवर के आरक्षित पद पर नियुक्ति दी जाए, भले ही वर्तमान में पद खाली न हो।
बदनीयती पर कोर्ट सख्त
जानबूझकर रोका गया इंटरव्यू पत्र गुना के सुरेश शाक्य ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित ड्राइवर पद पर नियुक्ति के संबंध में यह याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट ऐश्वर्य पार्थ साहू (इटारसी) की दलीलों से कोर्ट सहमत हुआ।
मामला
विश्वविद्यालय ने 26 मई 2017 को जारी विज्ञापन के तहत 23 जून 2018 को ड्राइवर पद के लिए साक्षात्कार आयोजित किए थे। अधिवक्ता साहू ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को इंटरव्यू का पत्र साक्षात्कार की तारीख (23 जून 2018) को ही प्राप्त हुआ, जिससे वह साक्षात्कार में शामिल नहीं हो सका।
यूनिवर्सिटी का बचाव
बचाव में यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि पत्र वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया था, जिसे न्यायाधीश विवेक जैन ने स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट का कड़ा आदेश : पद सृजित कर दें नियुक्ति
उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय की ‘बदनीयती और ‘पसंदीदा उम्मीदवार के चयन की मंशा’ को समझते हुए यह माना कि याचिकाकर्ता को निष्पक्ष अवसर से वंचित किया गया।
नियुक्ति का आदेश
कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता सुरेश शाक्य को निष्पक्ष अवसर से वंचित करने के उपचार स्वरूप विश्वविद्यालय पद खाली न होने पर भी अतिरिक्त पद सृजित कर 15 दिन के भीतर साक्षात्कार आयोजित करे और उसे नियुक्ति प्रदान करे।
जुर्माना
विश्वविद्यालय द्वारा 7 साल तक जवाब पेश नहीं करने पर कोर्ट ने उस पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी आरोपित किया है। 7 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, गुना के सुरेश शाक्य को यह महत्वपूर्ण न्याय मिला है। इस मामले में विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता विवेक शर्मा एवं प्रियंक शांडिल्य ने पक्ष रखा था।









