पंचायत सचिव की मौत से नाराजी, सीईओ को दिया ज्ञापन

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रीतेश राठौर, केसला। मुख्यमंत्री जनसेवा योजना (Chief Minister’s Public Service Scheme) अंतर्गत आयोजित शिविर के दौरान ग्राम पंचायत झुनकर के सचिव दिलीप चौधरी (Secretary Dilip Choudhary) की हृदयघात से हुई मृत्यु पर पंचायत सचिव ने नाराजी जताई है। पंचायत सचिवों का मानना है कि सरकारी योजनाओं (Government Schemes) के क्रियान्वयन में अनावश्यक दबाव के कारण इस तरह की घटना हुई है।

जनपद पंचायत केसला की सीईओ (CEO of Janpad Panchayat Kesla) के नाम आज दिए ज्ञापन में पंचायत सचिवों ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए कहीं न कहीं योजनाओं के तहत हितग्राही को तत्काल लाभ, शीघ्र अति शीघ्र कार्य पूर्ण कराने एवं समस्त योजनाओं की प्रगति के लिए सचिव की जिम्मेदारी तय करने जैसे कार्यवाही जिम्मेदार है। उक्त स्थिति में न सिर्फ सचिवों को कार्य करने में परेशानी हो रही है, बल्कि मानसिक दबाव से भी जूझना पड़ रहा है।

ये की है ज्ञापन में मांग

– शासन स्तर से प्रधानमंत्री आवास योजना (Prime Minister’s Housing Scheme) के अंतर्गत किश्त की राशि सीधे हितग्राहियों के खाते में डाली जाती है, ऐसे में हितग्राहियों के द्वारा समय पर कार्य न कराए जाने की स्थिति में हमेशा पंचायत सचिवों के सिर पर कार्यवाही की तलवार लटकती रहती हैं। जब हितग्राहियों के खाते में शासन के द्वारा सीधी राशि अंतरित कर दी जाती है, तो ऐसे में ग्राम पंचायत द्वारा प्रत्यक्ष और अनुशासित नियंत्रण बना पाना जमीनी स्तर पर शत प्रतिशत संभव नहीं हो पाता है।

कई बार हितग्राहियों के साथ समन्वय स्थापित करने फील्ड पर कार्य कर रहे सचिव से हितग्राही के आपसी गतिरोध के चलते हाथापाई तथा वाद विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है। इन परिस्थितियों के दृष्टिगत पंचायत सचिवों को प्रधानमंत्री आवास योजना (Prime Minister’s Housing Scheme) के कारण होने वाली कार्यवाही जैसे निलंबन, वसूली इत्यादि से मुक्त रखा जाय।

– वर्तमान समय में देखा जा रहा है कि ग्राम पंचायत सचिवों से आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) बनवाने के लिए सचिव/ग्राम रोजगार सहायक की स्वयं की आईडी से बनाने हेतु कार्य सौपा गया है। आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) की योजना स्वास्थ विभाग (Health Department) से संबंधित होने के कारण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का इसमें हस्तक्षेप किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता और इस प्रकार के कार्य करने से ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत विभाग के द्वारा किए जाने वाले मूल कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।

-वर्तमान में ग्राम पंचायतों में विभिन्न निर्माण कार्य तथा अन्य योजनाओं की समीक्षा के लिए सवेरे शाम तथा रात्रि में कार्य करने तथा करवाने का चलन आम होता जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में पंचायत सचिव जो दिनभर ग्राम पंचायत कार्यालय में बैठकर अपना कार्य करते हैं तथा इसी दौरान फिल्ड में भी विभिन्न योजनाओं को संचालित करते हैं, उनको विभिन्न वीडियो कॉन्फ्रेसिंग (Video Conferencing) तथा शिविरों में प्रातः काल, सायं काल, रात्रि एवं छुट्टी के दिनों में भी कार्य करना पड़ रहा है।

इस प्रकार के कार्यालय समय के अतिरिक्त पंचायत सचिवों से कार्य लिए जाने पर पारिवारिक जीवन पूर्णतः प्रभावित हो रहा है, जिससे घरेलू झगड़े एवं पारिवारिक विवाद की स्थिति पैदा होती है, जिसका सीधे असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। तनाव के कारण स्वास्थ्य, सड़क/वाहन दुर्घटना जैसे आशंका बनी रहती है।

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