इटारसी। कटनी की जिस अर्चना तिवारी को पूरे देश में तलाश किया जा रहा था, वह नेपाल बॉर्डर पर धनगढ़ी जिला लखीमपुर खीरी उ.प्र में मिली है। वह जज बनना चाहती है और घर वाले उसकी शादी एक पटवारी के साथ करना चाहते थे, परिवार के दबाव से मानसिक रूप से परेशान अर्चना ने ट्रेन से लापता होने का प्लान अपने मित्रों के साथ बनाया था। रक्षाबंधन के लिए इंदौर स्थित हॉस्टल से निकली अर्चना इटारसी तक आयी और अपने एक पुराने क्लाइंट के जरिए अपने एक मित्र के साथ इटारसी से शुजालपुर गयी और वहां से इंदौर और वहां से हैद्राबाद गयी।
आज भोपाल जीआरपी ने मामले का खुलासा किया है। अर्चना ने जीआरपी को बताया कि वह हैदराबाद से दिल्ली गई और दिल्ली से टैक्सी से अपने मित्र सारांश के साथ धनगुढ़ी नेपाल पहुंच गई। धनगुढ़ी से काठमांडू पहुंची, जहां सारांश ने अपने परिचित वायपी देवकोटा से बात कराकर होटल में रुकवाया और सारांश वापस इंदौर आ गया। कुछ दिन बाद देवकोटा ने उसे एक नेपाल की सिम दिलवा दी थी जिससे में वाट्सअप के माध्यम से सारांश से बात करती रही। इंदौर के सारांश और इटारसी के तेजेंदर ने दोस्त होने के कारण उसकी मदद की थी जिससे में नेपाल तक पहुंची थी। उसने बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है। सारांश के माध्यम से पुलिस ने उससे संपर्क किया और बताया कि आपके परिवार वाले बहुत परेशान हैं, वापस आ जाओ। इसके बाद वह काठमांडु से प्लेन से धनगुढ़ी आई और धनगुढ़ी से नेपाल बॉर्डर लखीमपुरी पहुंची जहां पर मध्यप्रदेश जीआरपी पुलिस भोपाल की टीम के साथ में जीआरपी थाना रानी कमलापति आ गई।
ऐसे हुई थी लापता
अर्चना तिवारी ने बताया कि 07 अगस्त 2025 को ट्रेन 18233 नर्मदा एक्सप्रेस कोच बी-3 बर्थ नंबर 03 पर अपने घर जाने की यात्रा कर रही थी। रक्षाबंधन के कारण घर के लिए रवाना हो गई परंतु मैंने सोच लिया कि मैं घर नहीं जाउंगी और न ही शादी करूंगी, जब तक मैं सिविल जज नहीं बन जाती। उसनेे रेलवे स्टेशन इटारसी पहुंचने से पहले अपने पुराने क्लाइंट तेजेन्दर सिंह जो पंजाब का रहने वाला है, वर्तमान में इटारसी में रहता हैं उससे मदद मांगी कि मुझे इटारसी उतरकर वापस इंदौर जाना है, फिर अपने दोस्त सारांश को भी फोन लगाकर इटारसी बुला लिया था। तेजेंदर को बताया दिया था कि जहां इटारसी स्टेशन पर कैमरे न लगे हों वहां उतार लेना। तेजेंदर नर्मदापुरम स्टेशन से साथ हो गया। रेलवे स्टेशन के पूर्व उसे ट्रेन से उतारकर तेजेंदर ने दोस्त सारांश के साथ भेज दिया। सारांश के साथ उसकी कार मे बैठकर शुजालपुर आ गई थी। शुजालपुर से इंदौर निकल गई थी इंदौर में घरवालों के आ जाने के डर से हैदराबाद चली गई। 11 अगस्त 2025 को हैदराबाद से दिल्ली पहुंची और दिल्ली से टैक्सी से सारांश के साथ धनगुढ़ी नेपाल पहुंची।
मामले को सुलझाने में उपपुलिस अधीक्षक (रेलवे) रामस्नेह चौहान, निरीक्षक जहीर खान, निरीक्षक संजय चौकसे, निरीक्षक प्रकाश सेन, निरीक्षक बबीता कठेरिया, उप निरीक्षक एमएस सोमवंशी, एएसआई विजय तिवारी, आर डी तेकाम, प्रहलाद यादव, बृजेश, अनंतराम कुशवाह, प्रधान आरक्षक मनोज सिंह कुशवाह, रानू अतुलकर, अनिल सिंह, अजय प्रताप सिंह, अमित तिवारी, रविपंदन प्रजापति, संतोष शुक्ला, दीपक, जुगल किशोर, अनिल कुमार, दीपक अहिरवार, संदीप मीणा, राजपाल जाटव, अखलेश चौहान, नंदकिशोर पाराशर, राजपाल जाटव, ब्रजेश, राहुल शर्मा, लक्ष्मी सोमवंशी, अमित सक्सेना (सायबर सेल) की सराहनीय भूमिका रही है।
अर्चना के मुंहबोले भाई ने दिये 51 हजार

अर्चना तिवारी के मुंहबोले भाई अंशु मिश्रा ने अर्चना की तलाश करने वाले को 51 हजार रुपए देने की घोषणा की थी। अर्चना के मिलने पर यह रकम उन्होंने भोपाल पहुंचकर जीआरपी के सुपुर्द की है और कहा है कि जीआरपी इस रकम को जैसे चाहे इस्तेमाल करे।
2 हजार सीसीटीवी फुटेज खंगाले
अर्चना तिवारी की तलाश में पुलिस ने विंध्य पर्वत के जंगलों की खाक छानी, एसडीआरएफ की टीम ने मोटर वोट से नर्मदा खंगाल दी, लेकिन अर्चना न तो जंगल में गिरी थी और ना नर्मदा में। जीआरपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रेन 18233 के रिर्जवेशन चार्ट एवं संबंधित स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों के रिर्जवेशन चार्ट को प्राप्त कर जांच की तथा उक्त कोच में गुम महिला के आसपास के यात्रियों के घर जाकर पूछताछ की। सरदही थानों से संपर्क कर जानकारी प्राप्त की। रेलवे स्टेशन इंदौर, भोपाल, सीहोर, रानी कमलापति, नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, करेली, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, बिलासपुर तक व शहरों में लगे लगभग 2 हजार सीसीटीव्ही फुटेजों को खंगाले गये।
नर्मदा खंगाली, जंगलों की खाक छानी
नर्मदा नदी में लगभग 32 किलोमीटर तक एसडीआरएफ एवं जीआरपी ने सर्च ऑपरेशन चलाया। रानी कमलापति से जबलपुर तक अलग-अलग टीमें बनाकर पैदल सर्चिंग कराई एवं बरखेड़ा से बुदनी तक वन विभाग के साथ जीआरपी की टीमों के साथ जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया। इलेक्ट्रोनिक संसाधनों के माध्यम से संदेही के नंबर की जानकारी प्राप्त की, जिस पर से इंदौर एवं शुजालपुर में संदेही की पहचान सारांश जोकचंद के रूप मेंकर पुछताछ की गई। पूछताछ में गुम महिला अर्चना तिवारी से संपर्क कर नेपाल बॉर्डर धनगढ़ी जिला लखिमपुर खीरी उ.प्र. से बरामद करने में सफलता हासिल की गई।









