इटारसी। कविवर भवानी प्रसाद मिश्र ऑडिटोरियम में संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से साथी जनशिक्षण एवं संस्कृति समिति नर्मदापुरम की ओर से एकदिवसीय नाट्य समारोह का आयोजन किया। डॉ. रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एकांकी कौमुदी महोत्सव नाटक के निर्देशक रत्नेश साहू ने बताया कि यह नाटक भारतवर्ष के वैभवशाली साम्राज्य ईसा पूर्व 322 के समय पर आधारित है, जब आर्यावर्त पर नंद के शासन में आचार्य चाणक्य का अपमान किया। आचार्य चाणक्य ने समस्त नंद वंश का विनाश कर संपूर्ण आर्यावर्त का सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य को शासक बनाया।
यह एकांकी इस बात पर आधारित थी कि एक राजा को उसकी सत्ता में रहते हुए सावधानी और बुद्धिमानी से शासन करने तथा भोग विलास से दूर रहते हुए सैनिक के तरह कार्य करने और राजसत्ता के काल में राजा के नीतिगत उचित आचरण और नैतिक मूल्यों को स्थापित करना चाहिए। इस नाटक में विद्वान डॉ. कश्मीर सिंह उप्पल, डॉ. व्हीके सीरिया और नगर पालिका उपाध्यक्ष निर्मल सिंह राजपूत, डॉ. नमन तिवारी उपस्थित थे। नाटक के विभिन्न पात्रों ने अपने सशक्त अभिनय से सभी दर्शकों को सम्मोहित किया और नाटक में समाहित संदेश को स्थापित करने में सफल रहे।
नाटक में सम्राट चंद्रगुप्त की भूमिका में अभिषेक सैनी, आचार्य चाणक्य की भूमिका में अभिषेक पालीवाल, वसुगुप्त समाहर्ता की भूमिका में पवन पालीवाल, यशोवर्मन की भूमिका में दीपक साहू, पुष्पदंत कार्यवंतिक की भूमिका में राजेंद्र धनवारे, अलका राज्य नर्तकी व विषकन्या की भूमिका में वैष्णवी दुबे तथा दौवारिक के रूप में धर्मेंद्र साहू, सैनिक की भूमिका में रीतेश कुमार, बृजेश शर्मा और राजीव मिश्रा थे। नर्तकियां तेजस्वी राजपूत व महक राजपूत थीं। प्रकाश विन्यास सुहास नागरले ने एवं वस्त्र विन्यास और रूप सज्जा सीमा मोरे, सोनाली साहू और मधु मिश्रा की थी।
गीत डॉक्टर जया नरगिस और गायन सुश्री रागनी तरडे तथा संगीत डॉ. जया नरगिस और स्व. श्रीमती जयश्री तरडे ने दिया। संगीत में विशेष सहयोग के हितेश बस्तवार और विजय बस्तवार का रहा। मंच संचालन नीरज सिंह चौहान ने किया। नाट्य समारोह में अनिल शुक्ला, शीतल साहू, सूरज दुबे, नीरज शुक्ला, अनुभव शुक्ल, शैलेश योना का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।





