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रविवार कामिका एकादशी व्रत सावन का दूसरा सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत के साथ

रविवार कामिका एकादशी व्रत सावन का दूसरा सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत के साथ

भोपाल। श्रावण कृष्ण पक्ष 11 रविवार, कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) 24 जुलाई (24 july) को है। मां चामुंडा दरबार के  पुजारी गुरू पं. रामजीवन दुबे (Priest Guru Pt. Ramjivan Dubey) ने बताया कि कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) शुभ योग 24 जुलाई से कामिका एकादशी से वृद्घि योग शुरू होगा।

यह योग दोपहर 2 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इसके बाद ध्रुव योग होगा। इस दिन द्विपुष्कर योग भी होगा। द्विपुष्कर योग 24 जुलाई को रात 10 बजे से 25 जुलाई तक सुबह 5:38 बजे से होगा। इसके अलावा कामिका एकादशी को रोहिणी नक्षत्र रात 10 बजे तक है जिसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा।

कामिका एकादशी का पारण

पारण का अर्थ है व्रत तोडऩा। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद एकादशी का पारण किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत का महत्व और लाभ व्रत तोडऩे के बाद ब्राह्मणों को दान दें। इस दिन किया गया दान अधिक महत्वपूर्ण होता है। कहा जाता है कि कामिका एकादशी की कथा श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी।

इससे पहले वशिष्ठ मुनि ने दिलीप राजा को बताया था। इस कथा को सुनकर उन्होंने अपने पापों से मुक्ति पा ली और मोक्ष प्राप्त कर लिया। माना जाता है कि कामिका एकादशी का व्रत करने से ब्राह्मण हत्या के पाप से मुक्ति मिलती है। कामिका एकादशी के बाद, श्रावण मास के व्रत और त्योहारों की शुरुआत होती है। इसलिए कहा जाता है कि इस कामिका एकादशी का अधिक महत्व होता है।

इसलिए दो बार करना चाहिये एकादशी का व्रत: कई बार एकादशी का व्रत लगातार दो दिन करने की सलाह दी जाती है। यह सलाह दी जाती है कि स्मार्त को परिवार के साथ पहले दिन ही उपवास रखना चाहिए। वैकल्पिक एकादशी उपवास, जो दूसरा है, संन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष चाहने वालों के लिए सुझाया गया है। जब स्मार्त के लिए वैकल्पिक एकादशी उपवास का सुझाव दिया जाता है तो यह वैष्णव एकादशी उपवास के दिन के साथ मेल खाता है।

सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग में

सावन माह का पहला प्रदोष व्रत दूसरे सोमवार के साथ श्रावण कृष्ण पक्ष 12 सोमवार प्रदोष व्रत के साथ सावन का दूसरा सोमवार का व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग में 25 जुलाई को मनाया जावेगा। रुद्राभिषेक के साथ शिवालयों में भगवान शिव की पूजा- पाठ की जावेगी। हर-हर महादेव ऊँ नम: शिवाय का जाप किया जावेगा। शिवालयों में मेले लगेगें। भक्तों का सेलाब उमड़ेगा।

पूजा शिवजी की पूजा के लिए सामग्री: इसके अलावा कुछ लोग भांग घोंटकर भी चढ़ाते हैं. शिवजी की पूजा में लगने वाली सामग्री में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्वपत्र, दूर्वा, फल, विजिया, आक, धूतूरा, कमल-गट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप का इस्तेमाल किया जाता है. बाड़ भूक प, बिजली गिरने, अधिक वर्षा से भगवान शिव जान माल की रक्षा करें।

सावन सोम प्रदोष व्रत 2022 पूजा मुहूर्त- प्रदोष व्रत के दिन पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए सावन का पहला प्रदोष व्रत 25 जुलाई, सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त शाम 07 बजकर 17 से रात 09 बजकर 21 तक रहेगा। तेज बारिश होगी।

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