---Advertisement---

पचमढ़ी से निकलेंगी मध्यप्रदेश के विकास की कई योजनाएं

By
On:
Follow Us
  • पंकज पटेरिया
Many plans for the development of Madhya Pradesh will emerge from Pachmarhi

मध्यप्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन में 3 जून को प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक हो रही है। नर्मदांचल के शिवाजी महाराज कहे जाने वाले भारत माता के अमर सपूत राजा भभूत सिंह को समर्पित महत्वपूर्ण बैठक राज भवन में होगी। सूबे के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस दौरान करोड़ों रुपयों की सौगात सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी को भेंट करेंगे। यहां जिक्र मौजू है कि चिंतन मनन की दृष्टि से भीषण गर्मी के इन तपते दिनों में सतपुड़ा की रानी पुष्प और प्रपात की मनोहारी स्थली पचमढ़ी लंबे समय से राज नेता, बुद्धि जीवियों, लेखकों की पसंदीदा जगह रही है। पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने भी अहम बैठकों आदि के लिए पचमढ़ी को प्राथमिकता दी थी। बल्कि सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसले भी यहां लिए। यहां तक ही नहीं बरसों पहले कांग्रेस सरकार के दौर में प्रदेश की यह राजधानी बनती थी।

मुख्यमंत्री राज्यपाल मंत्रिमंडल और आला अफसर गर्मी भर पचमढ़ी में डेरा डाले रहते थे। सारे सरकारी कामकाज पचमढ़ी से ही संचालित होते थे। गर्मी के दिनों में देश के प्रथम राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद भी पचमढ़ी प्रवास पर आते थे। उनकी स्मृति में राजेंद्र गिरी नामक एक मनोरम स्थल भी है। पत्रकारिता करते हुए चार पांच दशक पहले की या दो दशक के सफे पलटायें तो पता लगता है कि पचमढ़ी की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने की परंपरा प्रदेश के कीर्ति शेष मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने शुरू की थी। उसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र बने थे, उन्होंने इस परंपरा को बरकरार रखा। तभी यहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री के शानदार निवास बने मंत्रियों के भी आवास बनाए गए। दिलचस्प है कि इनके खूबसूरत नाम भी दिए गए थे जो आज भी इन आलीशान हरे भरे दरख्तों से घिरे खूबसूरत बंगलों के गेटों पर अंकित है। बतौर उदाहरण शेखर, चंपक, देवदारू, प्रस्तल आदि।

डीपी मिश्रा ने तो बताते हैं महादेव पहाड़ी के एकांत में स्थित एक सुरम्य बंगले को अपने लिये रखा था जहां वे लेखनरत रहते थे। कहा जाता है उनकी प्रसिद्ध कृति कृष्णायन की रचना इसी बंगले में हुई है। पचमढ़ी को शिव की नगरी भी कहा जाता है। यहां देवाधिदेव महादेव के अनेक मंदिर हैं, जिनके के दर्शन कर मन को अलौकिक सुख शांति मिलती है। इन पंक्तियों के लेखक ने स्वर्गीय पटवा की सरकार के दौरान तात्कालिक कलेक्टर सुरेश जैन के आग्रह पर इन स्थलों के दर्शन कर एक छोटी सी पुस्तिका भी शिव की नगरी पचमढ़ी नाम से लिखी थी। इसका कथासार यह है कि जब भस्मासुर को शिव जी ने यह वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रख देगा वह भस्म हो जाएगा। लिहाजा भस्मासुर महादेव जी के पीछे ही लग गया, पौराणिक कथा के मुताबिक तब शिवजी ने तिलक सिंदूर इटारसी से गुप्त प्रस्थान किया और पचमढ़ी के इन्हीं रमणीय स्थलों में वे शरण लेते रहे लेकिन भस्मासुर यहां भी आता रहा तब भगवान विष्णु ने मायारूप मे मोहनी नृत्य किया इससे सम्मोहित हो भस्मासुर भी नृत्य करने लगा, तभी विष्णु जी ने अपना हाथ सिर पर रखा उसका अनुकरण करते हुए भस्मासुर ने भी अपना हाथ सिर पर रखा और वह उसी क्षण भस्म हो गया।

खैर साहब पचमढ़ी में कई दुर्लभ जड़ी बूटी औषधि का भी अहम स्थल है, जिन पर शोध किया जाना चाहिए। लाइलाज बीमारियों की अचूक दवा यहां पाई जाने वाली जड़ी बूटियों से बनाई जा सकती है। पचमढ़ी प्रवास पर मुझे यह जानकारी तात्कालिक एक पर्यटन अधिकारी ने दी थी। जो स्वयं भी जड़ी बूटियों की जानकारी रखते थे और जंगलों पहाड़ों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी बूटी तो शक्ति वर्धक टॉनिक और गोलियां चूर्ण आदि अपने घर पर बना कर बाहर से आने वाले पर्यटक को बेचा करते थे। कुछ वर्ष पहले सरकार ने भी यहां जड़ी बूटी के शोध एवं निर्माण केंद्र के स्थापना की घोषणा भी की थी इस संबंध में पर्यटन विभाग के एक आला अफसर का प्रेस में बयान भी आया था। संभवत: उस दिशा में कुछ काम भी हुआ हो या कोरोना की जैसे प्राकृतिक संकट के कारण शुरू भी नहीं हो पाया हो। लेकिन यह सच है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के कार्यकाल में पचमढ़ी की तस्वीर तासीर बदली है।

यहां प्रदेश के अन्य जिलों की तरह विकास के कई काम हुए हैं। नहीं तो एक जमाना था की पचमढ़ी में दूध भी छिंदवाड़ा से आता था और साग भाजी भी सप्ताह में एक बार पिपरिया अथवा आसपास के नगरों से आती थी। तब कृषि विभाग के आला अधिकारी संभवत स्व रिछारिया ने यहां के बड़े पार्क में कृषि केंद्र में प्रयोग कर नई सब्जियां का आविष्कार किया था जिनमें काले जामुन नाम की एक सब्जी बहुत मशहूर होती थी। सब्जी ना मिलने की सूरत में इसे बनाकर खाया जाता था, जो बहुत जायकेदार लगती थी। पचमढ़ी के आम तो बहुत मशहूर हैं जो यूपी के उन्नत किस्म के आमों को टक्कर देने में पीछे नहीं है।

बहरहाल भाजपा सरकार ने प्रदेश ने सत्ता की कमान संभालते हुए पचमढ़ी के उलझे केश करीने से सुलझा कर संवारना शुरू किया तो विकास प्रगति की सिंदूरी छटा चतुर्दिक फेल गई है। नागरिकों की मूलभूत जरूरतें पूरी हो रही है। परिवहन सुविधाएं बेहतर हुई है। पर्यटकों को रहवास के लिए भी सरकारी गैर सरकारी आवासीय प्रबंध भी उपलब्ध है। खास ध्यान दिया जाता है कि पयर्टकों को कोई असुविधा ये न हो। वरना यह सर्द दुखद यादें भी इस पत्रकार के जेहन में है, जब तीन तीन दिन बिजली, पचमढ़ी में नहीं रहती थी। टेलीफोन भी बुक करने बाद तीन तीन दिन नहीं लग पाते थे। मेरी पीढ़ी के पत्रकारों ने यह सब भोगा है।

बहरहालभाजपा सरकार के कार्य काल में पचमढ़ी शक्ल सूरत तेजी से बदली है। किसी लेखक की कही यह बात यहां दोहराने का मन होता कि पचमढ़ी में बारह महीने बसंतोभास रहता है। आप एक बार पचमढ़ी आयेंगे, बार बार आपका आने मन होगा। लिहाजा पचमढ़ी बैठक से जाहिर है प्रदेश के हित में भी कई अहम फैसले आयेंगे। उम्मीद की जानी चाहिए।

वंदे मातरम।

पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार कवि
संपादक शब्द ध्वज
940 244 352

Rohit Nage

Rohit Nage has 30 years' experience in the field of journalism. He has vast experience of writing articles, news story, sports news, political news.

For Feedback - info[@]narmadanchal.com
Join Our WhatsApp Channel
error: Content is protected !!
Narmadanchal News
Privacy Overview

This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.