- अखिलेश शुक्ल, सेवा निवृत्त प्राचार्य, ब्लॉगर, लेखक
“आज रात 8:30 बजे के समाचार आप सरला माहेश्वरी की आवाज़ में सुनिएगा…” यह वाक्य 80 और 90 के दशक में करोड़ों भारतीयों के दिलों में एक अलग ही सुकून भर देता था।
12 फरवरी 2026 को भारतीय प्रसारण जगत ने उस सुकून भरी आवाज़ को हमेशा के लिए खो दिया। दूरदर्शन की प्रतिष्ठित समाचार वाचक सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से न सिर्फ एक दौर खत्म हुआ, बल्कि टेलीविजन पत्रकारिता के उस स्वर्ण युग का अंत हुआ, जहां समाचार का मतलब सिर्फ विश्वसनीयता, गरिमा और सादगी हुआ करता था।
कौन थीं सरला माहेश्वरी? विस्तार से…
1976 का वर्ष। आपातकाल लगा हुआ था, लेकिन दूरदर्शन के गलियारों में एक नई किरण उभर रही थी। सरला माहेश्वरी, जो उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही थीं, ने संयोगवश दूरदर्शन में कदम रखा और फिर यह सफर ऐसा चला कि वे तीन दशकों तक हर भारतीय के लिविंग रूम की जानी-पहचानी शख्सियत बनी रहीं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि समाचार जगत की यह प्रतिष्ठित हस्ती सिर्फ एक एंकर ही नहीं, बल्कि एक शिक्षिका भी थीं? सरला माहेश्वरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज में अध्यापन किया। और यहाँ एक दिलचस्प तथ्य सामने आता है – उनके छात्रों में से एक थे, जिन्हें आज पूरी दुनिया ‘बॉलीवुड का बादशाह’ कहती है – शाहरुख खान! हाँ, यह वही सरला माहेश्वरी हैं, जिनकी क्लास में कभी किंग खान बैठा करते थे।
उनका करियर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। 1984 के बाद वे कुछ समय के लिए लंदन चली गईं और वहाँ BBC में समाचार एंकर के रूप में काम किया। लंदन से लौटने के बाद वे फिर से दूरदर्शन से जुड़ गईं और 2005 तक लगातार सक्रिय रहीं।
जब समाचार पढ़ना एक ‘संस्कार’ हुआ करता था
उनके अंदाज़ की बात ही कुछ और थी। आज की तरह न तो कोई शोर था, न ही ख़बरों को ड्रामेटाइज़ करने की होड़। उनका शुद्ध हिंदी उच्चारण ऐसा था मानो संस्कृत के किसी विद्वान का पाठ हो। उनकी गंभीर लेकिन सौम्य आवाज़ में एक अजीब सी मिठास थी जो सीधे दिल में उतर जाती थी।
मैं आज भी उस दृश्य को याद कर सकता हूँ – पूरा परिवार टीवी के सामने बैठा है, और स्क्रीन पर जैसे ही माथे पर गोल बिंदी, लाल या पीली साड़ी में सजी-संवरी सरला जी प्रकट होती थीं, पूरे कमरे में एक अलग ही गंभीरता और सुकून छा जाता था। वे सिर्फ ख़बरें नहीं पढ़ती थीं, वे हमसे बात करती थीं, हमें विश्वास दिलाती थीं कि आज दुनिया में जो कुछ हुआ, वह सच है और भरोसेमंद है।
सादगी में छिपा था उनका असली आकर्षण
उनकी लोकप्रियता का एक बड़ा राज उनका व्यक्तित्व भी था। आज के दौर में जहाँ एंकर चमकीले कपड़ों और भड़कीले मेकअप में दिखते हैं, वहीं सरला माहेश्वरी अपनी सादगी की वजह से सबसे अलग थीं। माथे पर सजी गोल बिंदी, सलीके से पहनी गई साड़ी और चेहरे पर एक अटूट संयम – यही उनकी पहचान थी। उन्होंने कभी भी चमक-दमक को अपने काम पर हावी नहीं होने दिया।
उनकी यही सादगी और संयम दर्शकों के लिए उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक हिस्सा था। वे भरोसे की वो तस्वीर थीं, जिसे देखकर किसी को भी यकीन हो जाता था कि उसे सही और सच्ची जानकारी दी जा रही है।
दूरदर्शन परिवार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर ने पूरे मीडिया जगत को शोक में डाल दिया। दूरदर्शन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। डीडी नेशनल ने लिखा,
“दूरदर्शन परिवार की ओर से, हम सरला माहेश्वरी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वे दूरदर्शन की एक सम्मानित और पूजनीय समाचार वाचक थीं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में एक विशेष स्थान अर्जित किया। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों में गहरा विश्वास जगाया।”
टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्ण युग’ का अंत
ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे “टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्ण युग का अंत” बताया। उनके इस कथन में कितनी सच्चाई है, यह समझने के लिए हमें बस उस दौर के प्रसारण और आज के प्रसारण में अंतर देखना होगा।
आज जहाँ तेज़ी, ब्रेकिंग न्यूज़ और बहस का दबदबा है, वहीं सरला माहेश्वरी का युग शालीनता, गहराई और विश्वसनीयता का प्रतीक था। उनके जैसे एंकरों ने ही टेलीविजन पत्रकारिता की उस नींव को मजबूत किया, जिस पर आज का विशाल मीडिया जगत खड़ा है।
निष्कर्ष
उनके जाने से एक ऐसे युग की समाप्ति हुई है, जहां पत्रकारिता का मतलब सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक सेवा और एक जिम्मेदारी हुआ करती थी। यह वो विरासत है, जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।









