इटारसी। ग्राम सोनतलाई में यादव परिवार द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के तृतीय दिवस पर कथा व्यास युवा आचार्य पंडित सौरभ दुबे ने धर्म की महत्ता और मानवीय मूल्यों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य की पहचान उसके धर्म से होती है, और धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति अपनी मूल पहचान खो देता है।
धर्म परिवर्तन पर कड़ा संदेश
आचार्य श्री ने कहा कि जिस धर्म में हमने जन्म लिया है, उसी में जीवन व्यतीत करना चाहिए। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को न तो उसका पुराना समाज अपनाता है और न ही नया समाज उसे पूरी तरह मन से स्वीकार करता है। ऐसे में व्यक्ति की सामाजिक पहचान शून्य हो जाती है। उन्होंने जोर दिया कि आध्यात्मिक पथ पर अडिग रहने वाले लोग ही जीवन में सफल होते हैं।
राम नाम और गौ सेवा का महत्व
कथा के दौरान आचार्य दुबे ने राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि स्वयं भगवान शिव भी राम नाम का ही जप करते हैं और यही नाम जीव की मुक्ति का मार्ग है। इसके साथ ही उन्होंने गौवंश की दयनीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि भारतवर्ष की भूमि से गौ माता विलुप्त हो गई, तो धर्म भी विलुप्त हो जाएगा। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपने सेवा और सम्मान के मानवीय मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। कथा के प्रारंभ में मुख्य यजमान लक्ष्मी नारायण यादव एवं परिवार ने व्यास पीठ का पूजन कर आचार्य श्री का स्वागत-सम्मान किया।








