डॉ. विनोद निगम नर्मदा किनारे पंचतत्व में विलीन

डॉ. विनोद निगम नर्मदा किनारे पंचतत्व में विलीन

इटारसी। नर्मदापुरम (Narmadapuram) के नवगीतकार विनोद निगम (Vinod Nigam)का आज नर्मदा किनारे राजघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस अवसर पर उनके अनेक शुभचिंतक, साहित्य से जुड़े अनेक लोगों ने उनको अंतिम विदाई दी।

उनके निधन पर पत्रकार प्रमोद पगारे (Pramod Pagare) ने कहा कि कविता जिनकी जीवनसंगिनी थी। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले गीतों के राजकुमार विनोद निगम नर्मदा किनारे राजघाट पर मित्रों शुभचिंतकों और साहित्यकारों की मौजूदगी में पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके भतीजे ने उन्हें मुखाग्नि दी। पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा (Rameshwar Neekhra), जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष पंडित भवानी शंकर शर्मा (Pandit Bhavani Shankar Sharma), पूर्व विधायक पंडित गिरजा शंकर शर्मा (Pandit Girja Shankar Sharma), विधायक डॉ. सीता सरन शर्मा (Dr. Sita Saran Sharma), देशबंधु के संपादक पलाश सुरजन (Palash Surjan), अशोक जमनानी (Ashok Jamnani), राकेश दीवान, राकेश फौजदार, सुरेश उपाध्याय, डॉ कश्मीर सिंह उप्पल, प्रो. ज्ञानेंद्र पांडे, अरुण शर्मा, मुन्नू दुबे, अजय सैनी, राजू जमनानी, महेश पांडेय, कवि प्रमोद कुमार रघुवंशी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकारों, शुभचिंतकों ने 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

श्रद्धांजलि सभा का संचालन पंडित संतोष व्यास ने किया। स्वर्गीय विनोद निगम का न केवल मध्यप्रदेश में अपितु पूरे देश में कविता के क्षेत्र में बड़ा सम्मान था। उन्होंने जीवन भर मां नर्मदा किनारे अध्यापन कार्य किया और अपनी गीत की विधा को कभी नहीं छोड़ा। मृत्यु के कुछ दिन पूर्व भी वे एक काव्य समारोह में शामिल हुए थे। उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके द्वारा शिक्षित छात्र आज देश के बड़े पदों पर हैं।

तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने दिल्ली बुलाकर उनसे कविता सुनी। उनकी कविता में कभी आडंबर दिखावा और हल्कापन नहीं था। अन्ना हजारे के आंदोलन के समय उनकी लिखी गई कविता को भी पूरे देश ने गुनगुनाया। वे शब्द धर्मी थे शब्दों को जीते थे। उनके निधन से नर्मदापुरम में साहित्य जगत में जो कमी पैदा हुई है, उसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा सकेगा।

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AUTHORRohit

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