शनिवार, जून 15, 2024

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झरोखा : शिव की नगरी…महाकालेश्वर, महेश्वर और ओंकारेश्वर

: पंकज पटेरिया –
उज्जैन महाकाल देवाधिदेव महाकालेश्वर की नगरी और हाल ही में निर्मित शिवलोक, मरकरी लाइट की चांदनी में नहाता, मनोहारी अद्भुत लोक, अत्यंत भव्य और आल्हादकारी पर। दृष्टि पड़ते ही हम विस्मित हो जाते। अपनी सुध ही नही रहती। इस जन जगत से नाता टूट एक अलौकिक लोक से जुड़ जाता है। कोटि कोटि नमन उस सरकार को जिसने महाकाल के आशीष से इस दिव्य महानिर्मिति को जन जन के समक्ष उपस्थित कर दिया। मौजूदा सरकार भी इस लोक की अलौकिक शोभा सुषमा में श्री वृद्धि करने में प्राण प्रण से समर्पित है।
साफ सफाई सुरक्षा श्रेष्ठ श्रेणी की है। इसमें दो राय नहीं। अपितु वे विथिया, अथवा वे गलियां जो श्रद्धालु को दर्शन करवाने महाकालेश्वर के प्रत्यक्ष भव्य विग्रह दर्शन के लिए ले जाती हैं। दिन पर दिन बड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षित और सुखप्रद नहीं। अनेक मोड़ों पर सामान्य भक्तों की भीड़ और सशुल्क दर्शन करने वाले भक्तों की कतार में टकराव से तू तू मैं मैं की स्थिति निर्मित को जाती है। घनत्व बढ़ने से दम भी घुटने लगता है। आगे चलकर सशुल्क और निशुल्क भक्तों की पंक्तियां आपस में घुल मिल जाती। क्षण भर को दो दो चार चार के लोगों का समूह महाकालेश्वर के समक्ष पहुंचता है हाथ जोड़ भी नहीं पाते और आगे धकिया दिया जाता है। निजी होटल के रेट भी आसमानी है। बाकी मालवा अंचल के सहृदय स्नेह से भरे लोग आत्मीयता से गले लगाते हैं। लेकिन भविष्य को दृष्टि मे रखते हुए, दर्शन दीघा और बनाई जाना चाहिए। ताकि आस्थावान देश भर से आ रहे भक्त जनों को महाकालेश्वर के दर्शन सुगमता से हो सके। आशा की जानी चाहिए उज्जैन निवासी कर्मठ मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव 2028 में होने वाले सिहस्थ को मद्दे नजर रखते हुए चतुर्दिक विकास के भागीरथी प्रयास कर रहे हैं, उनमें निसंदेह ही मौजूदा समस्याओं के समाधान ढूंढे जाएंगे।
लोक माता अहिल्या जी की नगरी महेश्वर
महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन से हम वीरांगना एवं लोकमाता के रूप में प्रतिष्ठित अहिल्या जी की ऐतिहासिक नगरी महेश्वर आए। पूर्ण सलिला नर्मदा जी के गोद में बसा ऐतिहासिक नगर महेश्वरी का सौंदर्य भी अद्भुत है। अहिल्या माता का किला आज भी भव्य है। किले में वह प्राचीन शिव मंदिर है जहां अहिल्या जी नित्य पूजा अर्चना करती थी। वर्ष में एक बार एक करोड़ शिवलिंग का पूजन अभिषेक होता था जो अद्भुत महोत्सव के रूप में प्रसिद्ध था। अहिल्याबाई 300 लोगों को नित्य भोजन करवाती थी। राजज्ञा की जगह श्री शिव आज्ञा मुद्रा होती थी। देवी अहिल्याबाई ने देश भर में मंदिरों के जीर्णोद्धार करवाय एवं अनेक धार्मिक सामाजिक कार्य करवाएं। यहां एक अनमोल संग्रहालय ही है जिसमें शोभित है अहिल्याबाई की पालकी सोने का झूला उनकी तलवार आदि। महेश्वर में अनेक फिल्मों की शूटिंग भी हुई है। वही अपने साड़ी उद्योग के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। अहिल्याबाई ने स्वयं इस उद्योग को यहां बढ़ावा दिया। साड़ियों की वैरायटी कुर्ते, आधे कुर्ते कई रंग में उपलब्ध है। मौजूदा वक्त में कीमतें बहुत है। ये साड़ियां सामान्य वर्ग की पहुंच से बाहर है। यहां तक की और गांव कस्बे बाली स्त्रियां ललचाई दृष्टि से बाहर से देखती रहती हैं लेकिन खरीद नहीं सकती। एक ऐसे मंजर से भी इन पंक्तियों के लेखक का सामना हुआ था जब एक दुकानदार खुद भोली ग्रामीण स्त्री जी दुकान की सीडी चड रही से हाथ जोड़ बोला जीजी यह आपके लिए नही है। किला क्षेत्र के इर्द गिर्द भीषण गंदगी यहां देखी गई नालियां अपनी औकात छोड़ सड़क पर बह रह रही है। पार्किंग की भी कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। जब प्रदेश इस महान विरंगिणी विदुषी देवी अहिल्या बाई का त्रिशताब्दी महोत्सव मान रहा है उम्मीद की जानी चाहिए है इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जाएंगे। एमपीटी साफ सुथरा है गिनी चुनी सब्जियां भोजन में मिल जाती हैं लेकिन यह पकी है कि नहीं पकी इस पर किसी का ध्यान नहीं। आने वाले दिनों में यहां भारी पर्यटक आएंगे उसे ध्यान रखते हुए साफ सफाई, सड़क बिजली और खाने पीने की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन
12 ज्योतिर्लिंग में महाकालेश्वर के साथ ओंकारेश्वर भी पावन नर्मदा तट पर स्थित एक भव्य ज्योतिर्लिंग है। इन्ही के साथ यहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। मान्यता है दोनों ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पर पूर्ण ओंकारेश्वर दर्शन होते हैं। नर्मदा जी और कावेरी का सुंदर संगम स्थल है। और आदि शंकराचार्य जी की प्रतिमा के भव्य दर्शन भी दूर से हो जाते हैं, अभी वहां कुछ काम और चल रहा है। नर्मदा के तट पर कई छोटे बड़े पत्थर बिखरे पड़े हैं। धार्मिक मानता है की जो लोग यहां इन पत्थरों को जोड़ तोड़ कर अपना घर बनाते । और अपने घर की कामना करते हैं तो उनके घर भी भविष्य में बन जाते है। ओंकार के आकार में मांधाता पर्वत भी है सुरम्य वातावरण में परिक्रमा पथ है जिसकी श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं जो करीब 7 किलोमीटर की है और पैदल ही की जाती है। प्राचीन काल में यहां मांनधाता नगर था। जो बहुत भव्य था। उसे प्राचीन नगर के खंडहरों और अवशेष अभी विद्यमान है। अनेक प्राचीन मंदिर भी यहां विद्यमान है। लेटे हुए हनुमान जी महाराज, शिवजी, नर्मदा मंदिर केदारेश्वर मंदिर भी हैं। ज्योतिर्लिंग तक पहुंचाने के लिए नर्मदा जी पर स्थित झूला पुल भी है, सामान्य पथ भी। जल मार्ग से बोट द्वारा भी ओंकारेश्वर महादेव जी के दर्शन किए जा सकते हैं। ठहरने के लिए और भोजन आदि के लिए अच्छी व्यवस्था बाजार में है। उज्जैन इंदौर से या भोपाल से अपने वाहन या ट्रेन से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। ओम नमः शिवाय।

pankaj pateriya edited

पंकज पटेरिया
वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार
ज्योतिष सलाहकार
9340244352

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