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नवरात्रि विशेष: प्रार्थना की शक्ति अपार

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पंकज पटेरिया/ प्रार्थना की महिमा अनंत है। प्रार्थना की क्षमता अभूतपूर्व है, प्रार्थना का क्षेत्र असीम है और प्रार्थना की शक्ति अपरिमित है। प्रार्थना आत्मा का भोजन है। प्रार्थना के दिव्य चमत्कारी प्रभाव से विश्व में जन भलीभांति परिचित हैं । भारत सहित संसार भर के विभिन्न देशों में ऐसे अनेक उदाहरण मिले और मिलते हैं। जब घोरसंकट की स्थितियों में जब सारे संबल रह गये। तो प्रार्थना बल से आपदाएं-विपदाएं खत्म हुई, और स्थितियाँ अनुकूल बनी। प्रार्थना शक्ति मनुष्य को मृत्यु के द्वार से लौटाकर नवजीवन देती है। प्रार्थना परमात्मा और प्रार्थी के मध्य का जीर्वत संवाद देती है। आत्मा का इत्र होती है। आकुल – व्याकुल क्षणों में नम नयन और भारी मन से जब भक्त भगवान को करुण स्वर से पुकारता है तो भगवान भी भक्त के वशिभूत होकर भागे-भागे चले आते हैं। तथा दुःखी आर्थ जनों के दारूण, दुःख और विपत्ति की घड़ी में मदद कर उसके दुःख कलेश, कष्ट हरकर सुख शांति प्रदान करते हैं। भारत में तो पौराणिक काल से ही ऐसी अनेक घटनाओं के उदाहरण मिलते हैं। जब भीषण संकट की घड़ी में भगवान ने संकट ग्रस्त अपने भक्त की सहायता की है। चाहे सत्यवान सावित्री का प्रसंग हो, द्रोपति चीरहरण का प्रसन्ग हो अथवा प्रेम दीवानी मीरा के विषपान की घटना हो, प्रार्थना की दिव्य शक्ति सारी स्थितियों को उलट दिया। आधुनिक युग में रोज मर्रा के जीवन चक्र के चलते समय असमय दुःख दर्द चिंता तनाव भय आदि की स्थितियों, मन स्थितियों में प्रार्थना शक्ति के अलौकिक प्रभाव का अनुभव प्रत्यक्ष होता है।

महर्षि अरविंद ने कहा है कि प्रार्थना का प्रचंड चुंबकत्व अदृश्य शक्तियों की सहायता खींच लाने का सामथ्र्य रखता है। यह प्रार्थना का ही कमाल होता है। पंगु पर्वत चढ़ता है, चक्षुहीन देखने लगता है। और मूक वाचाल हो जाता हैं। सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती। प्रार्थना से मनुष्य के अंतर्जगत में विद्यमान प्रसुप्त अनन्त शक्तियां जाग जाती हैं और ऊर्जा के सहस्र द्वार जगमगाते खुल जाते हैं प्रार्थना का मूल विश्वास है। ईश्वर के प्रति अगाध श्रद्धा विश्वास से प्रार्थना का जन्म होता है और इस प्रार्थना बल से विश्वास शक्ति के ऐसे सूर्य का उदय होता है, जिसकी अरुणा आभा से सारे रोग शोक दूर हो जाते हैं प्रार्थना के लिए मामेकं शरणं ब्रज जैसा योगीराज भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है, भाव चाहिए। ईश्वर के चरण शरण में पहुंच जाने के बाद फिर कोई भय बाधा ही नहीं रह जाती और अखिलेश्वर के अक्षय आशीष मिलने लगते हैं। प्रार्थना के चमत्कारी प्रभाव की अनेक घटनाओं का उल्लेख मिलता है। लंदन के ख्याति नाम सर्जन डाॅ. हाॅवार्ड समरबेल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक हाफ आफटर ऐवरेस्ट में ऐसी कई आश्चर्यजनक घटनाओं का वर्णन किया हैं। जिसमें डॉक्टर द्वारा उम्मीद छोड़ देने के बाद एक मात्र प्रार्थना शक्ति ही से गंभीर रोगियों की असाध्य व्याधि ठीक हुई उन्हें स्वास्थ्य लाभ हुआ और वे भले चंगे होकर अपने घर लौटे। प्रार्थना शक्ति में संजीवनी स्वरूप की चर्चा करते हुए डॉक्टर शेरबुड् एडी ने भी अपनी किताब यू विल सरवाईज आफटर डेथ में लिखा है। कि सच्चे हृदय से ईश्वर को पुकारने पर उत्तर अवश्य मिलता है। अंत कारण की पुकार पर ईश्वरी सत्ता द्रवित हुई बिना नहीं रह सकती। अत प्रार्थना शक्ति के इस शाश्वत सत्य को स्वीकार कर प्रार्थी सच्चे हृदय से परम सत्ता को पुकारे तो कोई कारण नहीं उसकी पुकार अनसुनी रह जाये और प्रभु की कृपा दृष्टि तथा स्नेह संबल न मिले।

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पंकज पटेरिया
संपादक शब्द ध्वज
मो. 9893903003,9407505691

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