इटारसी। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने रेलवे स्टेशन पर स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के विस्थापन के विरोध में अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग उपस्थित थे।
क्या हैं मुख्य मांगें और चेतावनी?
- संगठनों ने अपनी मांगों को रखते हुए कहा कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम न करे।
- 1950 से पहले बने मंदिर को मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत नहीं हटाया जा सकता।
- जब तक मंदिर के स्वामित्व का प्रमाण पत्र श्री हनुमान जी महाराज के नाम पर नहीं हो जाता, तब तक नए निर्माण पर रोक लगाई जाए।
- पीपल के वृक्ष को उसी स्थान पर संरक्षित करने का लिखित आश्वासन दिया जाए।
- मंदिर हटाने से पहले मजारों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए।
एसडीएम का आश्वासन और संगठन की प्रतिक्रिया एसडीएम टी. प्रतीक राव ने संगठनों को आश्वस्त किया कि उनकी सहमति के बिना कोई भी कार्य नहीं होगा। उन्होंने सभी संगठनों के साथ बैठक करने और मंदिर का ड्राइंग और नक्शा दिखाने का वादा किया। जब तक सभी को नक्शा नहीं दिखाया जाता, तब तक निर्माण स्थल से बोर्ड हटा लिया जाएगा। एसडीएम ने यह भी कहा कि वह ग्वालबाबा, मेहरागांव स्थित मजार का निरीक्षण करेंगे और मंदिर से सटे अन्य अतिक्रमणों को भी हटाएंगे।
इस पर विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री चेतन सिंह राजपूत ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन राजनीतिक दबाव में कोई भी अनुचित कार्रवाई करता है, तो धर्म की रक्षा के लिए बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी स्थानीय और जिला प्रशासन की होगी। इस दौरान, अनूप तिवारी, घनश्याम बौरासी, जयपाल राजपूत, महेश वलेचानी, यश शर्मा सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।








