- अखिल दुबे

भारतीय हॉकी टीम का हालिया प्रदर्शन वाकई चिंताजनक है, खासकर एशियाई चैंपियनशिप 2025 में चीन जैसी निचली रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ 3 गोल खाना। जो टीम की वर्तमान स्थिति की असली तस्वीर दिखाता है।
चीन का उदय : हॉकी की दुनिया में एक नई चुनौती
चीन का हॉकी में आगे बढऩा एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने न केवल भारत के खिलाफ तीन गोल किए, बल्कि ये सभी गोल पेनल्टी कॉर्नर (क्कष्ट) से थे। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। यह दिखाता है कि चीन अपने हॉकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना निवेश कर रहा है। उन्होंने शायद विदेशी कोचों और विशेषज्ञों की मदद से अपने खिलाडिय़ों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया होगा। आने वाले 5-7 सालों में, चीन विश्व हॉकी में एक बड़ी चुनौती बन सकता है, और यह बात हमें गंभीरता से लेनी चाहिए।
भारतीय हॉकी का निराशाजनक प्रदर्शन : पतन की ओर?
यूरोप लीग में IHF Pro League में 8 में से 7 मैच हारना और फिर एशियाई चैंपियनशिप में वही कमियां दोहराना असहनीय है। यह दर्शाता है कि टीम अपनी गलतियों से कुछ नहीं सीख रही है। टीम में कोई नई सोच, कोई नया प्रयोग या कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।
टीम की मुख्य कमियां इस प्रकार हैं
- कमजोर डिफेंस स्ट्रक्चर : श्रीजेश के संन्यास और हरमनप्रीत, अमित रोहिदास, सुमित कुमार जैसे अनुभवी खिलाडिय़ों की बढ़ती उम्र ने टीम के डिफेंस को कमजोर कर दिया है। जुगराज सिंह का टोटल डिफेंस टेकल बेहद कमजोर है, जो एक बड़ी समस्या है।
- गोलकीपिंग की साधारणता : पाठक की गोलकीपिंग को साधारण बताना भी एक गंभीर चिंता का विषय है। गोलकीपर किसी भी टीम की अंतिम रक्षापंक्ति होता है, और उसकी कमजोरी पूरे डिफेंस को प्रभावित करती है।
- फील्ड गोल की कमी : अभिषेक और मनदीप जैसे खिलाडिय़ों की गति और सटीकता में कमी फील्ड गोल की कमी को दर्शाती है। यह दिखाता है कि फॉरवर्ड लाइन उतनी प्रभावी नहीं है जितनी होनी चाहिए।
आगे का रास्ता : एक ‘इस्फिग्स’ जैसा पुनर्निर्माण
भारतीय हॉकी इस समय एक चुनौतीपूर्ण और संक्रमण काल से गुजर रही है। इस स्थिति से निकलने के लिए हॉकी इंडिया को कुछ बड़ा सोचना और करना होगा। आपका ‘इस्फिग्स’ (ग्रीस का एक पौराणिक पक्षी जो अपनी राख से फिर से जीवित होता है) का उदाहरण बिल्कुल सटीक है। हॉकी इंडिया मैनेजमेंट को भी अपने अंदर वही इच्छाशक्ति और आत्मबल विकसित करना होगा।
हमें चीन की तरह ही एक बड़े प्रोजेक्ट और रणनीति पर काम करना होगा। इसमें शामिल हो सकता है-
- युवा प्रतिभा पर निवेश : जूनियर और सब-जूनियर स्तर पर एक मजबूत पाइपलाइन बनाना, ताकि नए और प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार हों।
- विशेषज्ञता का विकास : पेनल्टी कॉर्नर, डिफेंस और फॉरवर्ड लाइन के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ कोच नियुक्त करना।
- आधुनिक तकनीक का उपयोग : खिलाडिय़ों के प्रदर्शन का विश्लेषण करने और उनकी कमजोरियों को दूर करने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना।
अगर हॉकी इंडिया इन चुनौतियों का सामना नहीं करती है, तो मलेशिया और साउथ कोरिया जैसी टीमें भी हमारे लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। यह समय निष्क्रिय रहने का नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत करने का है।








