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गोवर्धन पूजा 2022 : जाने महत्‍व, पूजन विधि और सम्‍पूर्ण जानकारी

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गोवर्धन पूजा 2022 : जानें शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि, पौराणिक कथा, पूजा मंत्र सम्‍पूर्ण जानकारी 2022  

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) 

गोवर्धन पूजा

दीपावली के एक दिन बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहा जाता है। गोवर्धन पूजा की शुरूआत भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के समय (द्वापर युग) से प्रारंभ हुई। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्‍व होता हैं।

इस दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा के साथ मंदिरों में 56 प्रकार का भगवान को भोग लगाया जाता है। यह त्‍यौहार मथुरा में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत, गाय, बछड़े आदि का चित्र बनाकर पूजा करते हैं।

गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त (Govardhan Puja Auspicious Time)

गोवर्धन पूजा

  • सुबह के समय मुहूर्त : 6:35 से 08:47 तक
  • शाम के समय मुहूर्त 03:21 से 05:33 तक

गोवर्धन पूजा महत्व (Govardhan Puja Significance)

गोवर्धन पूजा

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का अत्‍यधिक महत्‍व होता हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के साथ, गाय और बछड़े का पूजन किया जाता है। इस दिन गौ माता की पूजा करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। मान्‍यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा करने से व्यक्ति को कई प्रकार के दोष से मुक्ति मिलती है और उसके जीवन में सुख, समृद्धि, धन व ऐश्वर्य का आगमन होता है।

गोवर्धन पूजा विधि (Govardhan Puja Method)

  • गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्‍नानआदि कर लेंना चाहिए।
  • इसके बाद गोवर से गाय, बछडे, एवं गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनायें।
  • इसके बाद हाथ में खील व जौ लेकर उन्हें थोड़ा-थोड़ा गिराते हुऐं सात बार परिक्रमा करें।
  • इसके बाद फूल-पुष्‍प अर्पित कर दीया, अगरबत्ती जलाएं कर पूजा करें।
  • भगवान श्रीकृष्‍ण को भोग लगायें।
  • भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान कर उनका आशीर्वाद लें।

यह भी पढें : अहोई अष्टमी व्रत 2022 : जानें तिथि, पूजन विधि, और सम्‍पूर्ण जानकारी

गोवर्धन पूजा की कथा (Story of Govardhan Puja)

गोवर्धन पूजा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता यशोदा भगवान इंद्र की पूजा करने की तैयारी कर रही थी, तो उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माता यशोदा से पूछा, कि वह भगवान इंद्र की पूजा क्यों कर रही हैं।

तभी भगवान श्रीकृष्ण की बातों का जवाब देते हुए माता यशोदा ने कहा कि सभी ग्रामवासी भगवान इंद्र की पूजा इसलिए कर रहे हैं, ताकि उनके गांव में अच्‍छी बारिश हो जिससे गांव में खूब फसलों की पैदावार होगी और गौ माता को खाने के लिए चारा मिल सकेगा।

माता यशोदा की बात सुनकर भगवान श्रीकृष्‍ण कहा कि अगर ऐसी बात है तो हमें इंद्र भगवान की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि इस पर्वत पर जाकर ही गायों को खाने के लिए घास मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण की बात यशोदा माता के साथ-साथ ब्रजवासियों ने सुनी और भगवान इंद्र देव की पूजा की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी शुरू कर दी।

गोवर्धन पर्वत की पूजा करते देख भगवान इंद्र क्रोधित हो गए और बहुत तेज बारिश करना शुरू कर दिया। तेज बारिश के कारण गांव के लोगों को काफी परेशानी होने लगें और भगवान श्रीकृष्ण से मदद मांगने गऐं। वहीं लगातार तेज बारिश के कारण लोगों के घरों में भी पानी भरने लगा और उन्हें सिर छुपाने के लिए कोई भी जगह नहीं मिल रही थी।

अपने गांव के लोगों की बारिश से रक्षा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली से उठा लिया, और सम्‍पूर्ण ब्रजवासी को इस पर्वत के नीचे जाकर खड़े कर लिया। भगवान श्रीकृष्‍ण ने इस पर्वत को एक सप्ताह तक उठाए रखा था। तभी भगवान इंद्र को पता चला कि भगवान श्रीकृष्ण, विष्णु का ही रूप है हैं

तब उन्‍हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने बारिश को रोक दिया। बारिश रुकने के बाद कृष्ण जी ने पर्वत को नीचे रख दिया और उन्होंने अपने गांव के लोगों को प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा करने का आदेश दिया, जिसके बाद से यह त्‍यौहार हर साल मनाया जाने लगा।

गोवर्धन पूजा मंत्र (Govardhan Puja Mantra)

श्रीगिर्रिराजधरणप्रभुतेरीशरण”

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