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रेलवे इंस्टीट्यूट 12 बंगला में फैला लैंप का प्रकाश, संस्थान अब कामरेडों के कब्जे में

रेलवे इंस्टीट्यूट 12 बंगला में फैला लैंप का प्रकाश, संस्थान अब कामरेडों के कब्जे में

टारसी। पश्चिम मध्य रेल संस्थान 12 बंगला के चुनावों में वेस्ट सेंट्रल रेलवे एंप्लाइज यूनियन ने सभी पदों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ का कोई भी पदाधिकारी रेल संस्थान में अपना स्थान नहीं बना पाया। रेल संस्थान 12 बंगला के सभी 9 पदों पर यूनियन के पदाधिकारी अपना लाल झंडा फहराने में कामयाब रहे हैं। चुनाव परिणाम के बाद यह कहा जा सकता है कि 12 बंगला रेल संस्थान में कामरेडों का कब्जा हो गया है। अब इस रेल संस्थान में लैंप का प्रकाश फैलेगा, जबकि गाय को मायूसी हाथ लगी है।

पश्चिम मध्य रेल संस्थान के चुनाव में वेस्ट सेंट्रल रेलवे एंप्लाइज यूनियन ने बाजी मारी। सचिव और कोषाध्यक्ष के साथ सात कार्यकारिणी सदस्य रेल संस्थान पर काबिज हो गए हैं।

इनको मिली जीत –

वेस्ट सेंट्रल रेलवे एंप्लाइज यूनियन : चुनाव मैदान में सचिव पद के लिए वकील सिंह व कोषाध्यक्ष के लिए विनोद गोरे थे। इनके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के लिए लेखराम मीणा, प्रदीप प्रजापति, सचिन यादव, शेख जावेद, तौसीफ खान, एमआर सूर्यवंशी दीपक कुमार थे। सभी को जीत मिली है।

इनकी हार –

पश्चिम मध्य रेलवे मजदूर संघ : चुनाव मैदान में सचिव पद के लिए आरके श्रीवास्तव और कोषाध्यक्ष के उम्मीदवार दीपक वर्मा थे। कार्यकारिणी सदस्यों के लिए अर्जुन उटवार, सौरभ गुप्ता, नितिन कनौजिया, देवेंद्र सिंह, देवांग वर्मा, कुलदीप दुबे और विकास कश्यप चुनाव लड़ रहे थे।

ये भी हारे

पश्चिम मध्य रेल कर्मचारी परिषद : चुनाव मैदान में सचिव पद के लिए योगेंद्र शर्मा और कोषाध्यक्ष के लिए पुष्पेंद्र चौहान थे। इनके अलावा कार्यकारिणी सदस्यों के लिए जितेंद्र कुशवाहा भीम यादव उर्मिला देवी राजकुमार मालवीय मनीष मेहरा, खेमेंद्र सिंह भदौरिया चुनाव मैदान में थे। इन सभी को हार का सामना करना पड़ा है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 12 बंगला रेल संस्थान में पश्चिम मध्य रेलवे मजदूर संघ का कब्जा था। संघ के पदाधिकारियों ने अपने कार्यकाल में जो भी काम कराए उनका यूनियन ने काफी विरोध किया। हाल ही में पश्चिम मध्य रेलवे एंप्लाइज यूनियन ने वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ शासित रेल संस्थान द्वारा कराई गई क्रिकेट प्रतियोगिता पर सवाल उठाते हुए मंडल स्तर पर इसकी शिकायत की थी। हालांकि बावजूद इसके प्रतियोगिता पूर्ण हुई थी। रेल संस्थान पर कब्जे को लेकर यूनियन ने काफी प्रयास किए। मजदूर संघ से कई बड़े नेता लाल झंडा यूनियन में आए। विगत करीब 1 वर्ष से वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ में 2 फाड़ होने से इससे जुड़े कर्मचारियों में भी दो गुट हो गए थे। कई लोगों ने मजदूर संघ को छोड़कर लाल झंडा यूनियन की सदस्यता ली। हालांकि तोड़फोड़ का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका था। एम्पलाइज यूनियन से भी कुछ पदाधिकारी मजदूर संघ में शामिल हुए थे, इन सब का भी चुनाव में काफी असर रहा। संघ के बड़े नेता यूनियन में गए और उन्होंने संघ के खिलाफ काम किया था।

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AUTHORRohit

I am a Journalist who is working in Narmadanchal.com.

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