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पचास वर्षों से स्थापित सबसे खूबसूरत मूर्ति को, 20 वर्षों से मिल रहा प्रथम पुरस्कार

पचास वर्षों से स्थापित सबसे खूबसूरत मूर्ति को, 20 वर्षों से मिल रहा प्रथम पुरस्कार

पचास वर्षों से स्थापित सबसे खूबसूरत मूर्ति को, 20 वर्षों से मिल रहा प्रथम पुरस्कार

भूपेंद्र विश्वकर्मा की विशेष रिपोर्ट
आज नवरात्रि के सप्तम दिवस पर हम आपको शहर की उस देवी प्रतिमा के दर्शन कराएंगे जो पिछले पांच दशकों से भी ज्यादा, शहर की सभी देवी प्रतिमाओं में सुंदरता के शिखर पर है, साथ ही यहां सजने वाली झांकी की चर्चाएं तो सारे शहर में रहती है। यह अत्याधिक सुंदर प्रतिमा है नवमी लाइन में श्री आध्यात्मिक उत्थान रामायण मंडल के द्वारा स्थापित की जाने वाली माँ दुर्गा का गौरी रूप। इस वर्ष 52वें वर्ष में यहां प्रतिमा की स्थापना की गयी है।

शुरूआती दौर
यह समिति मूर्ति स्थापना शुरू करने से पहले शहर की प्रसिद्ध भजन और रामसत्ता मण्डली थी। परन्तु समिति के कुछ सदस्यों के सुझाव और प्रयासों से यहां सन् 1966 में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की शुरुआत की गयी। शुरुआती समय में समिति में मुख्य रूप से स्व. मनोहरलाल मालोनिया, जगदीश चंद्र पटेल, किरण राय, बाबूलाल अग्रवाल, राजमल खंडेलवाल, शरद राय, शिवप्रसाद मालवीय, तेजसिंह ठाकुर, रघुवंश ठाकुर, शेरसिंह चौहान, दुर्गाप्रसाद, मोतीसिंह ठाकुर के साथ ही उमाशंकर पटाम्बर एवं प्रकाशचंद्र मलोनिया का सहयोग रहा है वही श्री पटाम्बर और मालोनिया जी अभी भी समिति के सक्रिय वरिष्ठ सदस्य है।
शुरुआत से ही यहां विराजने वाली माँ दुर्गा की प्रतिमा विभिन्न स्वरूपों में होती है परंतु हर रूप में प्रतिमा शहर की सबसे सुन्दर और आकर्षक पांच मुख्य प्रतिमाओं में शामिल रही है।


शुरुआत में यहां विराजने वाली प्रतिमा लगभग पच्चीस वर्षों तक शहर के प्रसिद्ध मूर्तिकार सुखदेव के द्वारा निर्मित की जाती थी। बाद में कुछ वर्षों तक समिति ने भोपाल से प्रतिमा निर्माण करवाया था। परन्तु अब फिर स्थानीय मूर्तिकार ही यहां विराजने वाली गौरी माँ की मूर्ति बनाते हैं। पिछले एक दशक से समिति लगभग दो से ढाई लाख रुपए की राशि एकत्रित करके नवरात्री में माँ की सेवा में लगाती है।
वर्तमान में समिति में लगभग दो दर्जन से ज्यादा सदस्य मुख्य भूमिका में अपने परिवार सहित शामिल है। वर्तमान में समिति की कार्यकारिणी में अध्यक्ष प्रकाशचंद्र मलोनिया एवं उमाशंकर पटाम्बर के साथ ही सक्रिय सदस्यों के रूप में सतीश अग्रवाल(सांवरिया), संजय खंडेलवाल, आकाश अग्रवाल, अशोक मालवीय, अजय खंडेलवाल, आशीष सोनी, दीपक राय, नीलेश मलोनिया, संदेश मालोनिया, कुनाल अग्रवाल, राजू सोनी, गौरी रसाल, सचिन जैन, पिंटू राय एवं मित्र मण्डली तन-मन-धन से माँ की सेवा करते हैं। वर्तमान में अगर शहर की पांच सबसे आकर्षक व सुन्दर प्रतिमाओं की बात की जाये तो यहां विराजने वाली प्रतिमा उनमे मुख्य रूप से शामिल हैं।

सत्य और रोचक बातें जो आपको जानना जरूरी है

•यहां विराजित होने वाली देवी प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता हर वर्ष सजने वाली विभिन्न प्रकार की आकर्षक और सुन्दर झांकी है। यहां सजने वाली झांकी शहर की शान है। साथ ही शहर भर में प्रतिमा स्थापना करने वाली कोई भी समिति इतनी आकर्षक झांकी नहीं सजाती, जितनीं कि यहां के युवाओं द्वारा की जाती है।

•हर वर्ष समिति द्वारा यहां नवरात्रि उत्सव अंतर्गत अनेक‍ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। जिसमें सभी समिति सदस्य परिवार सहित शामिल होते है। साथ ही पूरा क्षेत्रीय जनसमूह कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता देता है।

•समिति यहां हर वर्ष माँ दुर्गा के अनेक स्वरूपों व लीलाओं से सम्बंधित प्रतिमा की स्थापना करती हैं। शहर में देवी प्रतिमाओ के दर्शन करने निकलने वाले जनसमूह की पंसद में यहां विराजने वाली देवी प्रतिमा मुख्य रूप से शामिल होती है।

शहर में पूर्व में नगर पालिका द्वारा चल समारोह के अंतर्गत सबसे आकर्षक झांकी सजाने की प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी जिसमें यहां विराजने वाली प्रतिमा और झांकी को लगातार बीस वर्षों तक प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं आज भी अगर पुरानी प्रतियोगिता आयोजित की जाएं तो निःसंकोच यहां की झांकी को ही प्रथम पुरस्कार प्राप्त होगा।

•यहां विराजने वाली प्रतिमा अंतिम दिवस पर जब विसर्जन के लिए ले जाया जाता है तो विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है जिसमे प्रसिद्ध बुरहानपुरी ढोल एवं व्यापक स्तर पर आतिशबाजी की जाती है।

इस वर्ष का आकर्षण 
इस वर्ष भी समिति हर वर्ष की तरह ही विशाल शोभयात्रा के साथ प्रतिमा विसर्जन के लिए ले जायेगी। इसके पूर्व नवमीं तिथि पर विशाल भंडारे-प्रसादी का वितरण किया जायेगा।

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