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शांतिधाम और मुक्तिधाम के लिए मांगे रेलपांत के टुकड़े

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इटारसी। शांतिधाम श्मशानघाट जनभागीदारी समिति (Shantidham shmashanaghat janabhagidari samiti) के कार्यकारी सदस्य प्रमोद पगारे ने जबलपुर रेलवे जोन के जीएम और भोपाल मंडल प्रबंधक को पत्र लिखकर जनहित में नयायार्ड मेहरागांव नदी के समीप बने मुक्तिधाम की व्यवस्था में सुधार और शांतिधाम के लिए लोहे की रेल पांत के टुकड़े उपलब्ध कराने की मांग की है।
पगारे ने दोनों अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि नयायार्ड में रहने वाले रेलकर्मियों के आप संरक्षक हैं। उनके परिवार के सुख दुख भी आपके सुख दुख हैं। कोरोना महामारी के समय आप दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से निवेदन है कोरोना से पीडि़त होकर जिन रेल अधिकारियों, रेल कर्मचारियों और उनके परिजनों की अकस्मात मृत्यु हो रही है उनके अंतिम संस्कार न्यूयार्ड के समीप मेहरागांव नदी से लगे श्मशान घाट और इटारसी के गोकुल नगर खेड़ा स्थित शांति धाम शमशान घाट में हो रहे हैं। वहीं यार्ड के श्मशान घाट की अत्यधिक दुरावस्था है। पीने का पानी भी यहां उपलब्ध नहीं है और न ही बैठने के लिए छत है। यहां पर न्यू यार्ड सहित आसपास की निजी कॉलोनियों एवं मेहरागांव तथा इटारसी शहर के नाला मोहल्ले का एक हिस्सा और ग्राम गोची तरौंदा के मृत व्यक्तियों का अंतिम संस्कार (Funeral) होता है। दोनों ही स्थानों पर शव जलाने वाले चबूतरों की कमी हो गई है। उन्होंने मांग की है कि 8 फुट लंबे रेल लाइन (train line) के कबाड़ के टुकड़े जो आप नीलाम करते हैं वह दोनों श्मशान घाटों को उपलब्ध कराएं। एक चबूतरे में 6 रेल के टुकड़े 8 फिट लम्बे लगते हैं। न्यूयार्ड के श्मशान घाट में 6 चबूतरे बनना है, एवं एक बड़ा बैठक हाल बनना है। वही इटारसी के श्मशान घाट में सभी व्यवस्थाएं हैं। देश का इकलौता आईएसओ प्रमाण पत्र श्मशान घाट है। यहां केवल 10 नए चबूतरे बनना है। जिसमें 60 रेल के 8-8 फुट के टुकड़ों की आवश्यकता है। पुराने टायवार जो खराब हो चुके हैं वह भी करीब 100 की संख्या में चाहिए। आप जिन ठेकेदारों को नीलाम करते हैं उन ठेकेदारों से भी श्मशान घाट को उपलब्ध करा सकते हैं। परंतु न्यू यार्ड श्मशान घाट का कायाकल्प जरूरी है।

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