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कांग्रेस ने संपत्तिकर में कमी करने की मांग की

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नगर पालिका पहुंचकर सीएमओ को दिया ज्ञापन
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इटारसी। नगर कांग्रेस कमेटी ने आज दोपहर यहां नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर संपत्ति कर में कमी करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि नपा ने संपत्तिकर बढ़ाया है, जिसे वापस लिया जाना चाहिए। वरिष्ठ नेताओं के साथ नपा कार्यालय पहुंची नगर कांग्रेस ने बढ़े हुए संपत्तिकर में कमी करने की मांग की है।
पूर्व मंत्री विजय दुबे काकूभाई, पूर्व विधायक और पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष के अलावा पार्टी के आला पदाधिकारियों के साथ पहुंचे कांग्रेस के करीब आधा सैंकड़ा सदस्य नगर पालिका में नीचे से सीएमओ कार्यालय के सामने तक संपत्ति कर के विरोध में नारेबाजी करते हुए पहुंचे। यहां सीएमओ सुरेश दुबे को उन्होंने ज्ञापन दिया और बढ़े हुए संपत्तिकर को वापस लेने की मांग की।
इस दौरान पार्टी के रमेश साहू ने कहा कि जीआईएस सर्वे के आधार पर जो करारोपण किया है, वह तकनीकि रूप से गलत है, क्योंकि सर्वे ही गलत हुआ है। पूर्व मंत्री विजय दुबे काकूभाई ने कहा कि बढ़ा हुआ संपत्ति कर वापस लिया जाना चाहिए। कांग्रेस के इस आंदोलन में छह पूर्व नपाध्यक्ष विजय दुबे काकूभाई, सुंदरलाल भावसार, अनिल अवस्थी, श्रीमती नीलम गांधी, अशोक साहू और रवि जैसवाल शामिल थे। इनमें से केवल रवि जैसवाल, काकूभाई और अशोक साहू ही नियमों का हवाला देकर कर वापसी की मांग कर रहे थे, शेष खामोशी से बातें सुन रहे थे।
आंदोलन करने पूर्व विधायक अंबिका प्रसाद शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष पाली भाटिया, , मोहन झलिया, नगर कांग्रेस अध्यक्ष पंकज राठौर, युवक कांग्रेस से अर्जुन भोला, राजकुमार उपाध्याय केलू, मयूर जैसवाल, मधुसूदन यादव, पार्षद अरविंद चंद्रवंशी, पूर्व पार्षद नीलेश मालोनिया, महिला कांगे्रस से कमला राठौर सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।
इनका कहना है…!

कांग्रेस ने ज्ञापन दिया है, उन्होंने संपत्तिकर में कमी की मांग की है। फिर भी उनका यह ज्ञापन सक्षम जगह पहुंचा दिया जाएगा। इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष से चर्चा करेंगे और परिषद तक उनकी बात को पहुंचाया जाएगा। वहां से या राज्य शासन से ही कोई निर्णय होगा, जो भी होगा उससे उनको अवगत करा दिया जाएगा।
सुरेश दुबे, सीएमओ
हमने बहुत मामूली वृद्धि की है : नपाध्यक्ष
नगरपालिका अध्यक्ष सुधा अग्रवाल का आज कांग्रेस द्वारा संपत्ति कर में बढ़ोतरी को कम करने के लिए दिए ज्ञापन पर कहना है कि परिषद ने 300 से 400 प्रतिशत संपत्ति कर एक साथ नहीं बढ़ाया है। हकीकत ये है कि संपत्ति कर में वर्ष 15-16 में बहुत ही मामूली वृद्धि की गई थी। इसके बाद वर्ष 16-17 में कर नहीं बढ़ाया और आगामी वर्ष 17-18 में भी कर नहीं बढ़ेगा। ज्ञापन में जीआईएस सर्वे की गलत व्याख्या हुई है, ये सर्वे पूर्व परिषद के समय से चल रहा था और इस सर्वे में सिर्फ ये हुआ है कि त्रुटिवश जिन लोगों की संपत्ति नपा रिकार्ड में कम दर्ज थी, वे संपत्ति कर कम दे रहे थे, अब जीआईएस सर्वे के बाद उनकी संपत्ति का सही आंकलन होने के बाद उनका संपत्ति कर बढ़ा है तो सिर्फ उन्हें ही परेशानी हो रही है। जिन लोगों की संपत्ति का आंकलन शुरु से सही रहा था, उन्हें इस आंशिक बढ़ोतरी से फर्क नहीं पड़ा और वे अपना कर जमा भी कर रहे हैंं। यदि फिर भी सामान्य करदाताओं को लगता है कि उनकी संपत्ति का मूल्यांकन अधिक किया है तो वह नपा आकर आपत्ति लगा सकते हैं। इस त्रुटि को ठीक किया जाएगा। हमारा वादा है कि हर व्यक्ति की जायज समास्या का समाधान किया जाएगा। इसके अलावा बड़ी बात ये है वर्ष 2003-04 में वार्षिक भाड़ा मूल्य का 6 प्रतिशत संपत्ति कर बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया गया था। इससे संपत्ति कर की गणना ज्यादा होने लगी थी, हमने ऐसा कुछ नहीं किया है।

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