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बीस किलो राशन के लिए लगाना पड़ता है 30 किलोमीटर का फेर

बीस किलो राशन के लिए लगाना पड़ता है 30 किलोमीटर का फेर

इटारसी। पेट की भूख मिटाने की मजबूरी ग्रामीणों को महज 20 किलो राशन के लिए 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। बारिश के चार माह ग्रामीणों के लिए बहुत कठिन गुजरते हैं, क्योंकि दो गांव के बीच बहने वाली नदी (River) बारिश में अपना आकार सुरसा की भांति दोगुना कर लेती है।
यह पीड़ा है, ग्राम घुघवासा (Village Ghughwasa) के ग्रामीणों की। बोरतलाई (Bortalai) से बमुरिया (Bamuria) के बीच घुघवासा के करीब एक सैंकड़ा परिवारों को बारिश के चार माह अपने परिवार का 20 किलो राशन लेने के लिए 30 किलोमीटर चक्कर लगाते हुए ग्राम पंचायत मुख्यालय (Gram Panchayat Headquarters) पहुंचना पड़ता है। यहां उनको राशन मिलता है। अगर ग्रामीणों को इस लंबे चक्कर से बचना है तो उस नदी को पार करना पड़ता है, जिसमें हमेशा तेज बहाव के साथ पांच फीट तक पानी बहता रहता है।


उपरोक्त नदी को पार कराने में हमेशा ग्रामीणों को एकदूसरे की मदद करनी पड़ती है। सरपंच नवल पटेल, जनपद सदस्य मनोज चौधरी, एन कुमार बड़कुर, सोनू चौरे, बंटी पटेल एवं उपसरपंच नीरज पटेल ने बताया कि 12 महीने ही बहने वाली यह नदी बारिश में अपना आकार दोगुना कर लेती है, इसलिए घुघवासा से बीसारोड़ा का रास्ता बंद हो जाता है। पैदल यात्री ही तैरकर नदी को पार कर सकते हैं। लेकिन अनाज तो तैरकर नहीं लाया जा सकता, इसलिए सभी ग्रामवासी इकट्ठे होकर ट्राली (Trolley ) में बैठकर इटारसी (Itarsi) के रास्ते ग्राम बीसारोड़ा पहुंचते हैं, जबकि दोनों गांव के बीच की दूरी सिर्फ दो किलोमीटर है, लेकिन नदी पर पुल नहीं होने से 30 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।

 

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AUTHORRohit

I am a Journalist who is working in Narmadanchal.com.

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