रेस्ट हाउस की जमीन का मामला : अधिकारी ने किया निरीक्षण

रेस्ट हाउस की जमीन का मामला : अधिकारी ने किया निरीक्षण

इटारसी। रेस्ट हाउस (rest house) की जमीन मामले में फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जमीन के गलत आवंटन को लेकर और आवंटन से अधिक भूमि पर रोड निर्माण की शिकायत के बाद लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) के अधिकारी ने आकर इसका निरीक्षण किया तो शिकायत बहुत हद तक सही मिली और उन्होंने अनुमति देने वाले अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए। निरीक्षण के बाद कांग्रेस अब हमलावर स्थिति में आ गई है। सोशल मीडिया पर लगातार चर्चाओं में सत्ताधारी दल को घेरा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि रेस्ट हाउस (rest house) के दोनों तरफ बनाई गई सीमेंट सड़कों की अनुमति को लेकर जांच शुरू हो गई है। इस मामले में यह बात सामने आ रही है कि अनुमति देने की पात्रता नहीं होने के बावजूद लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) के कार्यपालन यंत्री (executive engineer) ने अनुमति जारी कैसे कर दी? लोनिवि के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई के निर्देश पर विभाग के अधीक्षण यंत्री पीसी वर्मा, एसडीओ एके महाला, एमपीआरडीसी के सहायक महाप्रबंधक प्रवीण निमजे, उपयंत्री एके मेहतो ने सड़क एवं लोनिवि की जगह का सीमांकन किया। अब जांच टीम उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन देगी। जाहिर तौर पर अब लोनिवि के कार्यपालन यंत्री एसके पाटिल की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

अधीक्षण यंत्री पीसी वर्मा (Superintending Engineer PC Verma) के अनुसार उन्हें शासन से इस मामले की जांच कर कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश प्राप्त हुआ है। स्थल का निरीक्षण करने पर प्रथम दृष्टि में लोक निर्माण विभाग की जमीन पर सीमेंट कांक्रीट का निर्माण किया जाना पाया गया है और जिस अधिकारी द्वारा अनुमति देने की बात की जा रही है, उसे अनुमति देने का कोई अधिकार ही नहीं था। यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और इस पर शासन को निर्णय लेना है।

इन लोगों ने की थी शिकायत

रेस्ट हाउस की जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर छह लोगों ने इस प्रकरण में शिकायत की थी, जिसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई है। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान शासन द्वारा बेची गई जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले मुकेश गांधी, ज्ञानेंद्र उपाध्याय भी मौजूद थे।

गांधी ने बताया कि अधिकारियों द्वारा उन्हें लिखित सूचना के आधार पर बुलाया था। विश्राम गृह की जमीन के एक हिस्से को शासन ने निजी कंपनी को बेच दिया है, इस जमीन को खरीदने वाली कंपनी द्वारा भूमि के दोनों और सड़क का निर्माण किया गया है। जमीन खरीदने वाली कंपनी ने उस जमीन पर भी सड़क निर्माण किया है, जो शासन द्वारा बेची ही नहीं गई है। उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने विश्राम गृह की इस जमीन के मामले में मुकेश गांधी और ज्ञानेंद्र उपाध्याय की याचिका पर स्थगन आदेश दिया है। वर्मा ने बताया कि 7.50 मीटर की सड़क में 11.50 मीटर एवं 7.40 मीटर चौड़ी सड़क पर 12.50 मीटर चौड़ी सीसी रोड पाई गई है।

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