आज गूगल डूडल पर दिखने वाली महिला बालमणि अम्मा के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी 2022
आज गूगल डूडल पर दिखने वाली महिला बालमणि अम्मा कौन हैं, जाने इनके व्‍यक्तिगत जीवन, शिक्षा, विवाह, पहचान के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी  

आज गूगल डूडल पर दिखने वाली महिला बालमणि अम्मा के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी 2022

आज गूगल डूडल पर दिखने वाली महिला बालमणि अम्मा कौन हैं, जाने इनके व्‍यक्तिगत जीवन, शिक्षा, विवाह, पहचान के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी  

बालमणि अम्मा व्‍यक्तिगत जानकारी (Balamani Amma Personal Information)

पूरा नाम नालापत बालमणि अम्मा
पिता का नाम चित्तंजूर कुन्हुन्नी राजा
माता का नाम नलपत कोचुकुट्टी अम्मा
जन्म तिथि 19 जुलाई 1909
मृत्यु के समय आयु 95 साल वर्ष
मृत्यु तिथि 29 सितंबर 2004
जन्म स्थान पुन्नयुरकुलम, मालाबार जिला, मद्रास प्रेसीडेंसी, भारत
मृत्यु स्थान कोच्चि , केरल , भारत
मृत्यु का कारण अल्जाइमर रोग
धर्म हिन्दू धर्म
नागरिकता भारतीय
पेशा कवि
वैवाहिक स्थिति वैवाहिक
पति का नाम वी.एम.नायर
बच्चे 3 बेटियाँ :  कमला सुरैया ,सुलोचना ,श्याम सुंदरी

1 बेटा : मोहनदास

आज गूगल डूडल पर दिख रही महिला कौन हैं (Who Is The Woman Appearing on Google Doodle Today)

बालमणि अम्मा

गूगल डूडल पर आज आपको एक महिला की पेंटिंग दिख रही वह महिला बालमणि अम्मा मलयालम साहित्यकार हैं। बालमणि अम्मा दादी अम्मा के नाम से भी जानी जाती हैं गूगल उनके 113 वें जन्मदिन के मौके पर उनकी याद में हर वर्ष उनकी फोटो लगाता हैं।

इस पेंटिंग को केरल के आर्टिस्ट देविका रामचंद्रन ने तैयार किया हैं। अम्मा की पहली कविता कोप्पुकाई, वर्ष 1930 में प्रकाशित हुई थी। बालमणि अम्‍मा को कोचीन साम्राज्य के पूर्व शासक परीक्षित थंपुरन से एक प्रतिभाशाली कवि के तौर पर पहचान मिली हैं।

बालमणि अम्मा शिक्षा (Balamani Amma Education)

बालमणि अम्मा

बालमणि अम्‍मा का जन्म एक रूढ़िवादी परिवार में हुआ था उनके परिवार मे लड़कियों को स्‍कूल नहीं भेजा जाता था। इसलिए उनकी प्रारंभिक शिक्षा उन्‍होनें अपने घर से ही प्राप्‍त की हैं। जिनसे उन्होंने संस्कृत और मलयालम भाषा सीखी। इन्‍हें किताब पढने का काफी शौक था यह अपनी अलमारी को पुस्तकों भरकर रखती थी।

इन पुस्तकों में ताड़पत्रों पर उकेरी गई हस्तलिपि वाली पुस्तकें भी थीं। इन पुस्तकों में ‘बाराहसंहिता’ से लेकर टैगोर तक का रचना संसार सम्मिलित था। बालमणि अम्मा के मामा एन.नारायण.मेनन एक दार्शनिक कवि थे। जिन्होंने उन्हें साहित्य के लिए प्रोत्साहित किया।

बालमणि अम्मा विवाह (Balamani Amma Marriage)

बालमणि अम्मा

बालमणि अम्‍मा का विवाह 19 वर्ष की आयु में वी.एम.नायर से हुआ था। वी.एम.नायर व्यापक रूप से प्रसारित मलयालम अखबार मातृभूमि के प्रबंध निदेशक और प्रबंध संपादक थे उसके बाद वह एक ऑटोमोबाइल कंपनी में एक कार्यकारी रहें।

शादी के बाद बालमणि अम्‍मा अपने पति के कोलकाता चली गई थी। जब उनकी पहली संतान, कमला सुरैया का जन्म हुआ, तब बलमणि अम्मा की आयु 24 थीं। वर्ष 1977 में उनके पति वी.एम.नायर की मृत्यु हो गई थी।

पहली कविता से मिली पहचान (Identified from the first poem)

बालामणी अम्मा की पहली कविता, कोप्पुकाई वर्ष 1930 में प्रकाशित हुई थी जिसके बाद उन्हें कोचीन साम्राज्य के पूर्व शासक परीक्षित थंपुरन से एक प्रतिभाशाली कवि के रूप में पहचान मिली। थंपुरन ने उन्हें ‘साहित्य निपुण पुरस्कार’ से सम्मानित भी किया था।

बालामणि अम्मा ने अपनी कविताएं मलयालम में  लिखीं और उनकी रचनाएं पूरे दक्षिण भारत में मनाई गईं। उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कविताएं हैं मज़ुविंते कथा (द स्टोरी ऑफ़ द कुल्हाड़ी) अम्मा के बेटे कमला सुरय्या, अम्मा (मां), मुथस्सी (दादी), जो बाद में एक लेखक बनें। उन्होंने अपनी मां की एक कविता, “द पेन” का अनुवाद किया जिसमें एक मां के दर्द का वर्णन करने वाली कुछ पंक्तियां थीं।

पद्म विभूषण से सम्मानित (Awarded Padma Vibhushan)

बालमणि अम्मा

बालमणि अम्मा ने अपने पूरे जीवनकाल में कई पुरस्कारों प्राप्त किए पर उनकी पहचान तब बनी जब साहित्य निपुण पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया। उन्हें पद्म भूषण भी मिला जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान हैं।

कैसे मिली दादी की उपाधि (How did you get the title of ‘Grandma’)

बालमणि अम्मा के नाम से कविता गद्य और अनुवाद के 20 से अधिक संकलन प्रकाशित हो चुके हैं। Google डूडल के अनुसार, बच्चों और पोते-पोतियों के लिए उनके प्यार का वर्णन करने वाली उनकी कविताओं ने उन्हें मलयालम कविता की अम्मा (मां) और मुथस्सी (दादी) की उपाधि दी हैं।

यह भी पढे : माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय

बालामणि अम्मा के पुरस्कार (Balamani Amma Awards)

  • सरस्वती सम्मान।
  • वर्ष 1963 मे  मुतासी के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार ।
  • वर्ष 1965 में मुतासी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार ।
  • वर्ष 1989 मे आसन पुरस्कार ।
  • वर्ष 1993 मे वैलेटोल पुरस्कार ।
  • वर्ष 1993 मे ललिताम्बिका अंधर्जन पुरस्कार।
  • वर्ष 1995 में शिक्षा पुरस्कार ।
  • वर्ष 1997 मे एन.वी. कृष्णा वारियर पुरस्कार।
  • 1987 में पद्म भूषण पुरस्कार ।

बालामणि अम्मा के काव्य (Balamani Amma’s Poetry Compilation)

  • कुदुम्बिनी (1936)
  • धर्ममार्गताल (1938)
  • श्री हृदयम (1939)
  • प्रभांकुरम (1942)
  • भवनयाल (1942)
  • ओंजलिनमेल (1946)
  • कालीकोट्टा (1949)
  • वेल्लीचथिल (1951)
  • हमारा पैर (1952)
  • प्रणम (1954)
  • लोकंतरंगल (1955)
  • सोपानम (1958)
  • मुतासी (1962)
  • माजुविंटे स्टोरी (1966)
  • अंबातिलेकु (1967)
  • नागरथिल (1968)
  • वेलारामबोल (1971)
  • अमृतंगयम (1978)
  • संध्या (1982)
  • निवेद्यम (1987)
  • मेरी बेटी (मलयालम) कुलक्कडविली
  • बालामणि अम्मा की कविताएं

मलयालम कविताओं के नाम (Name of Malayalam poems)

  • कूप्पुकई (1930)
  • अम्मा (1934)
  • कुटुंबनी (1936)
  • धर्ममर्गथिल(1938)
  • स्त्री हृदयम (1939)
  • प्रभंकुरम (1942)
  • भवनईल (1942)
  • ऊंजलींमेल (1946)
  • कालिकोट्टा (1949)
  • भावनाईल (1951)
  • अवार पेयदुन्नु (1952)
  • प्रणामम (1954)
  • लोकांठरांगलील (1955)
  • सोपनाम (1958)
  • मुथास्सी (1962)
  • अंबलथीलेक्कू (1967)
  • नगरथिल (1968)
  • वाईलारुंम्पोल (1971)
  • अमृथंगमया (1978)
  • संध्या (1982)
  • निवेद्यम (1987)
  • मथृहृदयम (1988)

बालमणि अम्मा की मृत्‍यु का कारण (Cause of Death of Balamani Amma)

बालमणि अम्‍मा की मृत्‍यु  29 सितंबर 2004 को हुई थी। उनकी मृत्‍यु का कारण अल्जाइमर रोग था। बालामणि अम्मा का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया था।

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