संस्मरण : धधकते अंगारे, थिरकते चरण अग्नि नर्तक राजेन्द्र जैन  (Fire dancer Rajendra Jain)

संस्मरण : धधकते अंगारे, थिरकते चरण अग्नि नर्तक राजेन्द्र जैन (Fire dancer Rajendra Jain)

– पंकज पटेरिया :
अशोक नगर मप्र निवासी प्रख्यात अग्नि नर्तक राजेन्द्र जैन (Fire dancer Rajendra Jain)  अद्भुत कलाकार, दो बार होशगाबाद आये। एक बार मुझसे मिलने, दूसरी बार रामजी बाबा मेले में प्रोग्राम देने। बहरहाल उनकी ख्याति देश भर रही। इससे ही प्रभावित हो कर अनुज मित्र अवधेश श्रीवास्तव के साथ अशोक नगर गया था। हम ने उनका पता पूछा ओर सीधे जैन मंदिर के पास उनके निवास पहुँचे दोपहर 3 या 4 बजे का वक्त था। अपना परिचय दे उनसे बातचीत की।
कैसे धधकते एक मन लकड़ी के अंगारो पर नंगे पैर घुघरू बांधे मुदित मन नृत्य करते रहते। जबकि दर्शक आँखे फाडे दांतो तले अँगूली दबाये यह हैरतअंगेज़ खतरनाक शो देखते रहते और तारीफ के फूलो की बरसात राजेन्द्रजी पर करते। अंगारो पर नाचते नाचते हँसते झुमते मुस्काते बाहर आते ही वही फूल सा खिला चेहरा देख लोग उन्हें बाहों में भर लेते। अनेक सम्मानों,पुरस्कारों से देश भर में नवाजे गए।
अग्नि नर्तक जैन ने बताया था वे सौ से ज्यादा शो देश भर में कर चुके, अनेक बार अनेक विशेषज्ञो ने भी उनके पैरों की जांच आदि की। कही कोई आग से बचाव के लिये कोई लेप तो नही लगाया गया लेकिन गहन जांच के बाद भी कोई कुछ भी नही कह पाया। मैंने जब इस बारे में पूछा तो राजेन्द्र भाई का कहना था बचपन से करता आ रहा हूँ आत्मशक्ति और इष्ट की कृपा है। इसके साथ दो पंक्तियां भी कहते है जब लगन लगा करती मन मे हर चीज सरल हो जाती है, चटटान भी हो कितनी सख्त वह भी तरल हो जाती है। सिर पर पानी भरे घड़े रख कर मोहक नृत्य भी अवधेश के स्थानीय रिश्तेदार श्रीवास्तव जी के यहाँ हमने उनका देखा। अरसे से उनसे संपर्क नही हो पाया,लेकिन अंगारो पर कुशल नर्तकी सी मोहक अंग संचालन करती नयनाभिराम मुद्रा वैसी ही आज भी आँखो में बरबस आ जाती और मन ही मन मैं उन्हें नमन कर लेता हूँ। धन्य है बुंदेलखंड की पावन भूमि का यह हीरा कलाकार।


पंकज पटेरिया (Pankaj Pateriya)
वरिष्ठ पत्रकार /कवि
सम्पादक: शब्दध्वज
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