झरोखा: प्रत्यक्ष देवता होते हमारे बुजुर्ग, इनसे रहता घर में उजास

झरोखा: प्रत्यक्ष देवता होते हमारे बुजुर्ग, इनसे रहता घर में उजास

* पंकज पटेरिया

रेल जंक्शन (Rail junction) की तरह हो गए वाट्स ग्रुप, 24 घंटे खबरों की रेलपेल मची रहती। खबरें कुछ चौका देती, कुछ सोचने को मजबूर कर देती, कुछ गुदगदा देती, तो कुछ रुला देती, कुछ निहायत बेमतलब। बहरहाल ग्रुप पर आई असम की यह खबर कि असम पहला ऎसा राज्य बन गया जहां यदि आप ने माता पिता का ख्याल नहीं रखा तो सेलरी से अमाउंट कट होकर माता पिता के खाते में चला जायेगा। अगर कोई नोकरीपेशा अपने पेरेंट्स की देखभाल नहीं करता, तो एक तय रकम उसकी सेलरी से काटकर माँ बाप को दे दी जाएगी, ताकि उनका गुज़ारा हो सके।

सांध्य दीप जीवन के सांध्य काल के ये टिमटिमाते दीप हमारे प्रत्यक्ष देवता है। इन्होने हमे जन्म दिया, बेहतर परवरिश की, खुद तकलीफ उठाते रहे, लेकिन हमारे लिए सारी सुख सुविधा जुटाते रहे। हमारी हलकी सी मुस्कान के लिए न जाने कितने जहर ये बुजुर्ग माता पिता पीते रहते। बहुत चुपचाप ओर अपनों से ही उपेक्षित अपमानित होते या किसी बुझे उदास ओल्ड होम में या घर के किसी कोने में बाकी के दिन सहमे गुजारते रहते। संयुक्त परिवार के टूटने के बाद एकल परिवार मे बुजुर्ग जो घर की रौनक, उजास,आधार शिला होते थे बेइंतहा परेशान ओर दुख तकलीफ से घिर गए। खुदगर्जी में मेरी बीबी, मेरे बच्चे की मानसिकता के चलते, बुजुर्ग आज बोझ समझे जाने लगे हैं। इससे बड़ी दर्द भरी सच्चाई क्या होगी, कि कभी जिन माता पिता की घर में उपस्थिति से हर दिन उत्सव पर्व सा बीतता था, बदले वक़्त में उनकी हालत ऎसी हो गई कि वो बस अपने में डूबे रहते है। जबकि रोज व रोज झुकती कमर, डगमगाते पांव, कांपते हाथ, कमजोर नजर के साथ खून पसीने से खुद के बनाए घर में आज पराधीन की पीड़ा सहते घर की सलवटें सबारते रहते है। ऎसे में असम राज्य का बुजुर्गो के हित में लिए फैसले का तहेदिल से स्वागत किया जाना चाहिए। बल्कि अन्य राज्य भी ऎसा अध्याय शुरू कर पुण्य अर्जन कर सकते है। इन बुजुर्गों के प्रति यह भी एक पूजा, अरदास, इबादत मानी जाएगी।

पंकज पटेरिया (Pankaj Pateria)
वरिष्ठ कवि पत्रकार
संपादक शब्दध्वज, ज्योतिष सलाहकार
9893903003, 9407505691

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