नज़्म: अरसा बीत जाता है

नज़्म: अरसा बीत जाता है

अरसा बीत जाता है

आगाज़ – ए – मोहब्बत तो
हो जाती है
पर
आशियां सजाने में
एक अरसा बीत जाता है

मंज़िल – ए – जीस्त का
इल्म हो चाहे
पर
सफ़र तय करने में
एक अरसा बीत जाता है

कदम – ए – दिलबर
साथ चलते रहें
पर
हमदम होने में
एक अरसा बीत जाता है

हसरत – ए – दिल चाहें
पूरी होती रहें
पर
सुकून पाने में
एक अरसा बीत जाता है।

– जीस्त _ ज़िंदगी
– हमदम _ जो आख़िर तक साथ दे

अदिति टंडन
आगरा (उ.प्र)

 

 

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