मत्रोच्चार के साथ महाकाल ज्योतिर्लिंग का महाभिषेक किया

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इटारसी। श्री दुर्गा नवग्रह मंदिर (Shri Durga Navagraha Temple) लक्कडग़ंज इटारसी (Lakkadganj Itarsi) में सावन मास के अवसर पर तृतीय दिवस रविवार को महाकाल ज्योर्तिलिंग (Mahakal Jyotirlinga) का पूजन एवं अभिषेक मुख्य आचार्य विनोद दुबे एवं वेद पाठी ब्राम्हणों सत्येन्द्र पांडे एवं पं. पीयूष पांडे द्वारा किया गया
उज्जैन (Ujjain) के क्षिप्रा (Kshipra) तट पर स्थित विश्व विख्यात महाकाल ज्योर्तिलिंग अपनी खास विशेषताओं के लिए जाना जाता है। ग्वालियर (Gwalior) का सिंधिया राजवंश (Scindia Dynasty) आज भी महाकाल (Mahakal) की नगरी में रात्रि विश्राम नहीं करता है और पूरी दुनिया के केवल महाकाल एवं कुंभ के कारण ही उज्जैन की पहचान है। भूगोल की कर्क रेखा (Tropic of Cancer) भी इसी के पास से गुजरी है।
आचार्य विनोद दुबे ने कहा कि सिंहासन वत्तीसी (Throne Vattisi) राजा विक्रमादित्य (King Vikramaditya) का आसन था। विक्रम संवत (Vikram Samvat) भी राजा विक्रमादित्य के नाम से जाना जाता है। उज्जैन ही एक ऐसा तीर्थ स्थल है जहां कृष्ण (Krishna) ने गुरू सांदीपनी (Guru Sandipani) के आश्रम में आकर शिक्षा ग्रहण की थी।
महाकाल ज्योर्तिलिंग को प्रतिदिन प्रात:काल की आरती में ताजे शव की चिता की भस्म चढ़ाई जाती है जिसे भस्म आरती कहते है।
आचार्य विनोद दुबे ने कहा कि उज्जयिनी के नरेश चंद्रसेन (Naresh Chandrasen) पक्के शिव भक्त थे तथा उन्हें शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था। महेश्वर (Maheshwar) के गण ने उन्हें एक चितामंणी भेंट दी थी जिस कारण देवता भी उनसे ईष्या रखते है। उज्जैन के आसपास के राजाओं ने नरेश चंद्रसेन से इसीलिए मित्रता की क्योंकि चंद्रसेन को जीतना संभव नहीं था, शिवजी का आशीर्वाद चंद्रसेन के साथ था।
उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल की प्रमुख धार्मिक अवसरों पर सवारी निकाली जाती है खासकर सावन के प्रत्येक सोमवार को महाकाल की शाही सवारी निकाली जाती है। कुंभ (Kumbh) के जो चार प्रमुख स्थान होते है उसमें भी महाकाल की विशेष सवारी निकाली जाती है। विनोद दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में क्षिप्रा नदी (Shipra River) के किनारे उज्जैन नगर बसा हुआ है जिसको इंद्रपुरी (Indrapuri) अमरावती (Amravati) या अवंतिका (Avantika) भी कहते हैं। दुबे ने कहा कि रामजी के भक्त हनुमंत लालजी (Hanumant Lalji) का भी उज्जैन से गहरा संबंध है, जिस समय भगवान दुष्टों का संहार कर रहे थे, उसी समय हनुमान जी भी उज्जैन आये और उन्होंने वहां के राजाओं को बताया कि भगवान भोलेनाथ (Lord Bholenath) के अलावा मनुष्य का उद्धार करने वाला अन्य कोई नहीं है।
उज्जैन नगरी संस्कृृति विद्या की प्राचीन पीठ है तथा धर्म, ज्ञान और कला का अद्भुत संगम है लाखों श्रद्धालु सावन मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने पवित्र नगरी उज्जैन आते हैं और धार्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।

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